राही हो सफ़र का बुलंद

राही हो सफ़र का बुलंद कदम मीलों चल गये
याद आते है अक्सर बीते खुशियों के पल गये |

तुमने लाख संभाला हमे उस चिकनी ढलान पर
ज़िद्द थी खुद सवारेन्गे मुक़द्दर और फिसल गये |

एक साथ जो समेटना चाहा आसमानी तारों को
जब मुट्ठी खोली देखा सब काँच में बदल गये |

हज़ारों नादानियों के बाद भी  हम साया बने रहे
आँचल को पकड़ कर  तेरी बच्चो से मचल गये |

तकदीर का हर पहलू बड़ा अजीब होता है ”महक
लंबी क्यों नज़र आए  सड़क जिधर निकल गये |

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किताबी सुर्ख गुलाब सा तेरा अफ़साना हुआ

देखा नज़र भर के तुझे जमाना हुआ
हमारी रुसवाईयों का सबब पुराना हुआ |
हम कब के भुला चुके तीर-ए-नश्तर
नफ़रत-ओ-गुबार दिल से रवाना हुआ |
दुनिया की दौड़ में हो गया शामिल
इंसान खुद की शख्सियत से बेगाना हुआ |
वो तो यूही किसीने जिक्र किया तुम्हारा
छुपाए राज़-ए-इश्क़ तब बताना हुआ |
मुश्किल गलियों से तेरी दहलीज़ तक पहुँचे
दीदार-ए-आफताब नाहो साजिशन सताना हुआ |
रस्मो की जंजीरे तोड़ के निकले जो
राह-ए-वफ़ा तय उनका गुजर जाना हुआ |
यादों और ख्वाबो में मिलने आओगे कभी
फ़िज़ूल ही झिलमिल अरमानो को बहलना हुआ |
सच्चाई को गले लगाना सिख ले “महक”
किताबी सुर्ख गुलाब सा तेरा अफ़साना हुआ |

 

 

 

 

 

 

कायनात झुक जाएगी

कायनात झुक जाएगी

हबीब-ए-सुलताना तेरा अक्स देखा था पानी में
ऐसा हुस्न-ए-माहताब पहेले न देखा ज़िंदगानी में |

सितारों की चुनर ओढ़ जो निकलेगी हूर-ए-जन्नत
कायनात झुक जाएगी छूने लब-ओ-गुल रवानी में |

मल्लिका-ए-दीदार-ओ-दिल नामुमकिन है यहा
शब-ओ-महक छोड़े वो अपनी कदम-ए-निशानी में |

जंजीर-ए-इश्क़ में क़ैद कर लिया है खुद को
रहनुमा गुस्ताखियाँ हो माफ़ हुई गर नादानी में |

होली मुबारक

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होली 

     //1//
मन में घुली मीठी गुझिया सी बोली हो 
प्यार के रंग लगाओ दुश्मन या सहेली हो |
गुबार वो बरसों से पलते रहे है दिल में
नफ़रत पिघलाती मिलन सार ये होली हो | 
गुस्ताखियों के अरमानो की लगती है कतारें 
हर धड़कन की तमन्ना उसका कोई हमजोली हो | 
जज़्बातों की ल़हेरें ऐसी  उठाता है समंदर
दादी शरमाये इस कदर जैसे दुल्हन नवेली हो | 
मुबारक बात दिल से अब कह भी दो “महक” 
आप सब के लिए होली यादगार अलबेली हो |

    //2//

छाई खुशियों की बौछार
के आई है होरी
मीठी गुझिया,मीठा मोरा सैय्या
दोनो पे टिकी होये
इस दिन नज़र हमारी

बड़ी स्वादिष्ट सी गुझिया
हाय,खाने को जियरा ललचाय
लागे एक ही बारी में
स्वाहा करूँ सारी
छुपाय के सबसे खाना पड़त है
देखे कोई ई न कह दे
बहुरिया घर की,सब से चटोरी.

देख सलोना भोला सैय्या
गोरियों का दिल मचल जाय
नटखट सखियाँ धोखे से
सजनवा को भंग पीलाय
जानत मस्ती,पर मन घबराए
कोई मोरे सैययांजी की
कर ले ना चोरी.

भूल,ख़ता माफ़,मन की स्लेट कोरी
रंगों से सजी हो सब जन की होरी.

-महक

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प्यार और दर्द का गहरा रिश्ता होता है

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प्यार और दर्द का गहरा रिश्ता होता है
दोनो है अलग फिर भी हमे भिगोता है |
दोनो में ही आँखों से निकलते वो आँसू
दोनो में ही दिल सिसक सिसक के रोता है |
तस्सली देनेवाले तो मिल जाते है बहोत
मरहमदवा करनेवाला कोई ना होता है |
चोट तो हमे लगती है मगर इस कदर
गले लगाओ जितना,मंन और चैन खोता है |
उनके चेहरे पर गम,अंदर मुस्कान के साए
दूसरे का गम देख,कोई और खुश होता है |
इतना ना करो जतन,के खुद को बैठो भुलाए
दुनिया के सामने तेरा  फसाना बहुत छोटा है |
पलकों का परदा हटाओ,सितारे गुलशन सजाए
ऐसा कभी ना सोच के तुझसे हर रब रूठा है |

रुपहली किरनो से सजाया जो आसमान

रुपहली किरनो से सजाया जो आसमान
चाँद के बिन सितारे अधूरे  से लगते  है |

समंदर की गहराई में छुपाया जो खजाना
मोतियो  के बिन सीप अधूरे से लगते है |

इज़हार करने जाओ जो गमजमाना
आसुओ के बिन नयन अधूरे से लगते है |

महफ़िल में सजाओ जो गीतो का तराना
सुरताल  के बिन साज़ अधूरे से लगते है |

तुम हमे कितनी अज़ीज़ कैसे करे बयान
महक‘  के  बिन फूल अधूरे से लगते है |

फूलों से रंग और महकती मधु बूंदे

फूलों से रंग और महकती मधु बूंदे
हर सुबह नज़रों से बिन भूले पिये जा |
फिर भंवरे के जैसी मीठी गुंजन करते
जीवन बगिया में  मद मस्त जिये जा |
कुदर की सुनहरी धूप और गरमाहट
हमेशा ,हर कदम पे महसूस किये जा |
जो प्यार इस धरा से तुम्हे नसीब हुआ
उसके कुछ अंश हर दिल को दिये जा |
ये सारी प्रक्रुति जब प्यार से चहकेगी
जाते हुए उसकी दुआ तू संग लिये जा |

तकदीर ने कुछ अनकहे फ़ैसले सुनाए

तकदीर ने कुछ अनकहे फ़ैसले सुनाए
कबुल कर उन्हे  सराखों  पर  लिये है |

ये दर्द छलक कही नासूर ना बन जाए
जख्म इस टूटे जिगर के सारे सिये है |

ये  सोचकर कही प्यासे  ना  मर जाए
जाम जहर  के हमने हंस कर पिये है |

जुदा होकर भी ,तेरी  खुशिया ही चाही
दुनिया की रस्मे रिवाज़ अदा किये है |

तुमने मोहोब्बत से कुछ पल ही चुराए
ज़िंदगी के पूरे लम्हे उसे हमने दिए है |

फूलों के बिस्तर उन्हे रास नही आया करते |


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

काटो से भरी राहे चुनकर जो चलते है अक्सर
फूलों के बिस्तर उन्हे रास नही आया करते |

इश्क़ की मुश्किल डगर जो थाम लेते एकबार
तूफ़ानो से डरकार वो वापस नही जाया करते |

जीवन की गहराई में जो सत्य रौशन कराए
झूठ के अंधेरो में वो कभी नही सोया करते |

खुदा की खुदाई पर जो जहन में भरोसा रखे
छोटिसी ठोकर से वो शक्स नही रोया करते |

रूह से रूह का रिश्ता जो जुड़ जाए कसम से
चाहे जनम बदल जाए वो टूट नही पाया करते |

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तेरे कदमो के निशान

रात रात भर करटे बदलते नज़र आये
तेरी यादों के साये बेवक़्त हमे सलते है |

दुनिया की सच्चाई से रिश्ता तोड़ लाए
तुझसे मिलनके ख्वाब में हम पलते है |

तुझ तक पहुँचना अब मुश्किल ना रहा
तेरे कदमो के निशान पर हम चलते है |

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