मुस्कुराहट के गुलाब

मुस्कुराहट के गुलाब

मुस्कुराहटसे सजे जो लब , नूर-ए-शबाब खिले है
एक मुस्कुराहट में हमारी , हज़ारो गुलाब मिले है |

हमारी मुस्कुराहटसे सबको , नशे चढ जाते है
कोई होश में आने से पहले, हम फिर मुस्करा लेते है |

मुस्कुराहट को एक बार तू चख ले जाहिल
जहर-ए-जाम भी ये अमृत बना देते है |

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मुस्कान

मुस्कान

खिली खिली सी नज़र आती
सब को ये लुभाती
कभी धीमी कभी चंचल सी
लबो पर ये बिखर जाती
कभी सिर्फ़ तेरी आँखों मे
स्मीत बन के चमके
कभी चाँद से चेहरे पे
मुस्कान बन के दमके