नादान दील

ये दील अक्सर नादान हरकतें करता है
अचानक ही धड़कना भूल जाया करता है
याद नही रखता अब कुछ और तेरे सिवा
हमारा होकर हमसे बेईमानी करता है |

खामोशियाँ भी तेरी

खामोशियाँ भी तेरी दिल को है गवारा अज़ीजजानशीन 
के किस्सा– मोहोब्बत तेरी आँखों से बयान हो जाता
दिलनादान को लगती है चोट,वो रोता भी है कभी कभी
समझाना उसे आसान होता,गर लफ़्ज़ों का मरहम मिल पाता |