समय भागता रहा

त्रिवेणी

1.समय भागता रहा अपनी रफ़्तार से
कुछ पाने की जिद्द थी मैं भी भागती रही
खुद को ही बहुत अजनबी महसूस कर रही हूँ 

2.हाथियों जितनी बड़ी खुरसियाँ बना कर
निरक्षर नेता बैठे उस पर
और पूरे देश का झूलुस निकालते है

3.टेबल के उपर फाइल का ढेर
टेबल के नीचे हाथों का हेर फेर
मिलकर रिश्वत का पेड़ लगा रहे है

4.मिलावट भरा राशन का सामान  खरीदा
कुछ छूटे पैसे ज़्यादा मिले लौटाए नही वापस
थोड़ी बेईमानी हमने भी सिख ली है ज़माने से

5.पैसों का ढेर लगाओ मंदिर के द्वारे
सबसे पहले दर्शन हो गये हमारे
 भगवान के पास भी वक़्त की कमी है

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