भीगे स्पर्श का एहसास

सागर किनारे तक आकर आलिंगन देती ल़हेरे
आते वक़्त भर भरके तुम्हारी यादे समेट लाती है

मेरे मन में उठते हुए  हज़ारों ख़याली तूफ़ानो को
बहुत दूर  कही तो अपने साथ वापस ले जाती है

गीली रेत पर तुम्हारा नाम प्यार से लिखते समय
तुम्हारे भीगे से स्पर्श का एहसास  करा देती है 

Advertisements

अधूरापन

अधूरा

इच्छायें , आकांक्षायें
क्या सिर्फ़ तुम्हारी ही होती है ?
जो के हमेशा पूरी होनी चाहिए
दिन भर काम करके 
मैं भी थक जाती हूँ
पर तुम्हे उससे कोई सरोकार नही
तुम्हे जो चाहिए तुम छिन लेते हो
कभी प्यार से , कभी हक़्क़ जता कर
और मेरी भावनाओ का क्या ?
जब तुम थक कर  आते हो
बात  भी नही करते
प्यार का स्पर्श बहुत दूर 
मेरे मन की आग काया में जलती है
कामिनी धग धगती है
शायद सुबह तक
बुझ भी जाती होगी
मगर एक अधूरेपन की चिंगारी सुलगा के…….

ख़यालों में

 

ख़यालों में

 

 

 

जब तुम पास नही होते

 

 

या पास होकर भी दूर होते हो

 

 

तेरा ही ख़याल करती हूँ मैं

 

 

पलकों के पर्दे पर तेरा चित्र बनाती

 

 

उन में प्यार के रंग भर देती

 

 

बेहोशी का आलम , मैं तुझे निहारती

 

 

कभी तुम भी आकर देखो

 

 

हमारे ख़यालों में ,

 

 

तेरे लिए क्या सोचती हूँ मैं

 

 

कभी तुम भी मुड़कर देखों ,

 

 

तेरे ख़यालों में डूबी हुई

 

 

हक़ीक़त में कैसी लगती हूँ मैं |

 

 

 

पवन बासूरी

पवन बासूरी

भोर की रंगों से सज़ा गगन
सुनहरी रश्मि का  आगमन
कीलरव से चहेका चमन
अंगड़ाई ले जागा मधुबन
अध खुले अध खिले  सुमन
शरारत भरी थोड़ी चुभन
पंखुड़ियों पर रेशम छूअन
पुलकित रोमांचित करता तनमन
बासूरी पर छेड़ी प्रीत गुंजन
प्यार महकाता नटखट पवन 

खुद से मिलना ज़रूरी होता है

दुनिया की भीड़ में खुद को ढालना  ज़रूरी होता है

 

दो पल बैठ किनारे कभी खुद से मिलना  ज़रूरी होता है |

 

 

 

दर्दधूप में जिगर जलते हुए हसना ज़रूरी होता है

 

जज़्बातों की बाढ़ बह जाए दिल से तब रोना ज़रूरी होता है |

 

 

 

उमरराहकदम में हमसफ़र होना ज़रूरी होता है

 

यहा सब को कुछ पाने के लिए कुछ खोना ज़रूरी होता है |

 

 

जुगनू बन कर जागता है कोई

काली घटाओं के पर्दे से झाकता है कोई 
अध खुले उन नयनो से ताकता  है कोई |

हम तो अनजान बन गुजर जाते मोड़ से
बावरा ये मन क्यों काफिर भागता है वही |
दर्पण से कुछ पूछू वो जवाब नही देता
मालूम नही चल रही क्या रास्ता है सही |
  

 

 

 

 

 

गवाह –दिल कहते मिली उनको मंज़िल
उस अजनबी रूह से अपना वास्ता है कोई |


 

 

 

अपनो के जज़्बात जहाँ लोग समझे नही
हमारे लिए जुगनू बन कर जागता है कोई |

शाम सुहानी सी

Image and video hosting by TinyPic

शाम सुहानी सी

धूप की चादर को हटाकर बिखर गये नीले स्याह से बादल
गरजत बरसात बूँदों का आना ,गालों पर सरका आँख का काजल |

ठंडी हवाओं का नज़दीक से गुज़रना नस नस में दौड़ती सहर
आँधियों का हमे अपने आगोश में लेना दिल में उठता कहेर |

उसी राह से हुआ तेरा आगमन ,एक छाते में चलने का निमंत्रण
नज़दीकियों में खिला खिला मन फिर भी था खामोशी का अंतर |

यूही राह पर कदम चले संग तुम्हारे कभी ना आए वो मंज़िल
बड़ी अजीब सी चाहत ,ख्वाब होते गजब के जो इश्क़ में डूबा हो दिल |

दरवाज़े तक तेरा हमे छोड़ना और मुस्कान में कुछ कोशीशन कहेना
समझ गया दिल वो अनकहे अल्फ़ाज़ और चलते हुए तेरा तोडसा रुकना |

हमशी  कह दू राज़ की बात ,ज़िंदगी की सब से थी  वो शाम सुहानी सी
रब्बा  शुक्रा में जीतने सजदे करूँ कम है उस  वक़्त तूने दुआ कबुल की |

बदरा दीवाने

Image and video hosting by TinyPic  

 

जानते हो तुम कितना गहरा असर होता है तुम्हारा हम पर
तुम बरसते हो कही दूर और हरियाली इस पार छा जाती  है|

 

 तपती बिलखती धरा मनाए नही मानती किसी की बात
सिर्फ़ तुम्हे देख  बदरा दीवाने उस पे मुस्कान आती है |

 

क्यूँ अकेला छोड़ उस को तू मुक्त विहार करता फिरता है
तेरा धरा से बूँदों का संगम जब होता खुशहाली लाती है |

तुमसे हूँ मैं और मुझसे हो तुम – ज़िंदगी

Image and video hosting by TinyPic

तुमसे हूँ मैं और मुझसे हो तुम वरना तो सब अधूरा 
यही लफ्ज़ बार बार मूड कर हमसे ज़िंदगी कहेती है | 

 

 

सुनो तुम मेरा गीत और मैं तुम्हारी धड़कन में बस जाउँ
बन जाए ऐसी धुन जिस में जीवन की नदिया मिलती है | 

 

 

साँसों में उसकी खुशबू घुली सी , ज़ुबान पर बन मिठास
आँखों में नमकिन सा पानी का झरना बन के रहती है | 

 

 

वैसे  कदम से कदम मिलाकर चलती ,पल पल का बंधन
जब  ज़रूरत महसूस होता साथ,तो  नज़रों से छिपती है | 

 

 

पशेमा पशेमा हो ये मन ढूंढता है उसे अंधेरो उजालो में
किसी कोने से झाकति ,मंद मुस्काती खिलती,बहती है |

 

 

 

 

 

 

 

 

उस गली के मोड़ पर

Image and video hosting by TinyPic

तेरे दर्द में सनम हम रह लेंगे 
इश्क़ में हुए हर सितम सह लेंगे 
दूर ही सही मगर दिल के करीब हो 
तेरे आने की आस है खुद से कह देंगे  |

———————-

अक्सर सवाल करते हो किस बात में छिपी है खुशी हमारी
इतना  समझ पाए अपनी तो जन्नत है मुस्कान तुम्हारी |

————————

संगीन गुनाह हुआ है  हमसे जमाने की नज़र में
कहते है कम उमर में  कैसे तुमसे इश्क़ कर बैठे  |

————————–

बहुत संभ कर ही चलते है राहसफ़रकदम
उस गली के मोड़ पर यकायक तुमसे टकरा जाते है |

« Older entries Newer entries »