हजीअली -मेरे मौला

हजीअली -मेरे मौला

चादर-ओ -फलक  से कीमती शामियाँ सजाऊँ
पहुंचे तुझ तक इबादत -ऐ -सफर दरमियाँ बनाऊँ |

ज़िंदगी से फलसफे सीखे बहुत मेरे मौला
रूबरू होकर तुझसे जहन की खामियां समझपाऊँ |

दुआएं मेरे अपनों के लिए कबुल कर मालिक
भुलेसे दिल दुखाये कभी हजारों माफियाँ मांगपाऊँ |

हजीअली -ओ -पीर  तेरे सजदे के करम से नवाज़
के वक्त-ऐ-दामन में हुई हमेशा गुस्ताखियाँ बताऊँ |

जहर -ऐ-गुबार मन में पैदा न हो “महक”
हर लब-ओ -गुलिस्ता पे मुस्कानों का आशियाँ बनाऊँ |

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कहते है लोग ये इश्क़

कहते है लोग ये इश्क़ top post

कहते है लोग,ये इश्क़ आग का दरिया होता है |
कैसे कहे,के इश्क़,किसिके दिल तक पहुँचने का ज़रिया होता है ||

कहते है लोग,ये इश्क़ एक आँधी लाती है |
हमे तो इश्क़ से,गिली मिट्टी की खुशबू,सौन्धि सौन्धि आती है ||

कहते है लोग,ये इश्क़ समंदर से भी गहरा होता है |
कैसे बताए,के इश्क़ में,हर पल एक नया सवेरा होता है ||

कहते है लोग,के इश्क़ में,कदम कदम पर संभालना होता है |
कैसे बताए,के इश्क़ में, दो दिलो को मिलकर,एक राह पर चलना होता है ||

कहते है लोग,के इश्क़ में,माँगनी होती एक मन्नत है |
कैसे समझाउ, के इश्क़ करना , हमारे लिए एक जन्नत है ||

कहते है लोग,ये इश्क़,किसी और की अमानत होती है |
कैसे कहे सबसे,ये इश्क़,खुदा की दी हुई एक नेमत होती है ||