कुछ दिल से

कुछ दिल से 

१. वैसे तो आपकी हर अदा से वाकिफ़ है दिलदारा 
   डरते है जब इश्क़ में इम्तेहान  देने की बात हो |

२. जब तक न तुमसे बातें हो दिल-ए-ग़ुरबत सुकून नही पाता 
   बार- २ दोहराओ वादा-ए-इश्क़,तब तक उसे यकीन नही आता |

३. बैचेनियों के तूफान क्यों उठते है दिल में हर वक़्त 
    तेरी एक नज़र बस ,इत्मीनान से थम जाया करते है |

४. रात की नींद भी सुहानी बने जो तू ख्वाब में आ जाए
     कोई सवाल मुश्किल नही ज़िंदगी का जो तू जवाब दे जाए |

५. तेरी मुस्कान को देख कर,हम भी रोज हंस लेते है
    तुझ से बातें करने संगदिल मगर बहुत तरस जाते है | 

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हाल-ए-दिल

हालदिल बयान कर रहे थे जब हम अपना
पाकमोहोब्बत है तुमसे ये मान लिया होता |
किसी भी हद्द से गुजर जाने का जुनून सवार
दावा सच्चा है हमारा कोई इम्तेहान लिया होता |
तेरे आने से पूरे हुए बहुत से अरमान हमारे
कितने रह गये बाकी ये जान लिया होता |
दिल में कभी  जगती वो तन्हाई की हसरत
भीड़ में गर तुमने हमे पहचान लिया होता |