तुम्हारे लिए

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वादा नही कर रही हूँ कोई तुमसे
क्यूंकी वादों की उमर बड़ी छोटी होती है
टूटने की खनक भी सुनाई नही देती
सारे सपने भी संग ले जाती है
चाहत का इरादा बाँध लाई हूँ
दिल में तुम्हारे लिए
ईरादों की डोर बड़ी पक्की होती है |

कसम नही लूँगी कोई तुमसे ना ही दूँगी
क्यूंकी इश्क़ तो घुल गया फ़िज़ा में
कितने समय तक निभा पाउँगी
कोई हिसाब नही दे सकती
हर कदम साथ रखेंगे इस ज़मीन पर
ये रस्म निभाउँगी तुम्हारे लिए
रस्मो से रिश्ते का एहसास होता है |

कीमती तोहफे नही ला पाई कभी
क्यूंकी किम्मत से दिल नही खरीदे जाते
मुरादें गर वक़्त पर पूरी ना हो
दरमियाँ के फ़ासाले फिर भर नही पाते
एक गुलाब देने की हैसियत रखती हूँ
महक जिसकी सिर्फ़ तुम्हारे लिए
जो यादों में बस कर सदा पास रहती है |

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बरसाती ख़याल कुछ यू भी

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मेघा आज फिर टुटके बरसे तुम मीत से
माटी से ‘महक’ ऊठी , इश्क में सराबोर निकली |

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ये क्या हुआ ‘महक’, दीवानगी की सारी हदे पार कर ली
सावन में बरसी हर बूँद तुने,अपने अंजुरी में भर ली |

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मौसम खुशनुमा , फ़िज़ायें भी ‘महक’ रही
तेरा नाम क्या लिया, फूलों की बरसात हुई |

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सावन की फुहार से ’महक’ बावरी हुई
बूंदो  के झुमके  पहन भीग रही छत पे |

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बारिश की लड़ी से नव पल्लवित रैना
इंद्रधनु के रंग उतरे ‘महक’  के  नैना |

इन फूलों की बारिश में

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इन फूलों की बारिश में
भीग लेते है हम भी
मोहोब्बत के इत्र की महक
जरा बदन पर चढा लूँ
अगले मौसम तक फिर
ये ताजगी रहेगी मन में .
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रिझाने प्रियतम फूल को,गुनगुनाया,बहलाया
खिली हर पाखी जब नाजुक प्रेम स्पर्श सहलाया
जज्बातों में बह के अपना मधुरस दे बैठा
मेरी मन तितली तो बस खुशबु की दीवानी है |

ye chitra humne kisi ke blog se liya hai,blog ka naam yaad nahi,unka shukran.

माचिस की वो तीली

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बहुत कुछ कहना चाहता है दिल ..ये अचानक चलते चलते सफ़र में …हम दोनों में दूरियाँ कहा से आ गयी ..

कभी तुम कहते,कभी हम कहते …शायद दोनों ही कहना कुछ चाहते ..और उन लफ्जों का अर्थ ..तर्क हम अपने

हिसाब से लगा लेते थे …एक दीवार बन गयी है ..न टूटने वाले ख्यालों की ..या अहम् की ..या किसी मज़बूरी की …

रोज ही कितने पल साथ साथ गुजर जाते है…मगर सारे खामोश….कोई रौनक नहीं उन में….राह के एक ही किनारे पर दो अजनबी टहलते है …कुछ खोजने की कोशिश करते हुए,..क्या खोया यही न मालूम मगर…..

पुल पर चढ़कर ..निचे से बहती नदिया की कल कल संग …दिल की तरंगों को बहने के लिए छोड़ देते है…

एक तरंग से दूजी तरंग मिलती है…..और उलझने और बढती जाती है …दो हाथ नजदीक है… थामने के लिए पहल करने हिचकिचाहट …

चाँद को ताकती चार निगाहें …वो मुस्कुराता है बस….मद्दत की उम्मीद मुझसे मत रखना ….ये चांदनी की छत्

ओढा दी है आसमान पे…..इन में खोज लो कोई जज़्बात मिले देख लेना..अपने आप ही …

क्या महसूस नहीं होता तुम्हे अब ..हमारे दिल का संगीत …वही धुन आज भी लय में थिरकती है …इश्क है तुमसे ….पहेला सा ही …..लाख कोशिश करूँ कहने की ..ये जुबान को किसने रिश्वत दी न जानू……

इस खामोशी को टूटना होगा ….हमारे लिए ….बस इंतज़ार है उस लम्हे का ….जो मन की कड़वाहट को पिघला दे..

रौशन कर दे ..वो बुझी शमा की लौ …पर माचिस की वो तीली कौन बनेगा …तुम या हम…..

समझ में आए किस्मत की बात है

रब के कुछ इशारों की जुबान नहीं होती |

ये इश्क भी क्या क्या खता करवाता है

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ये इश्क भी क्या क्या खता करवाता है
महबूब -ओ-दिल पे शक की सुइयां दिखाए

माना उनसा इमानदार न कोई कायनात में
वक़्त के साथ चलना उन्हें आता नहीं

मुलाकात की जगह हम मौजूद पहले से
राह चलते लोगों की सवालिया नज़र का क्या जवाब दे

ये कैसा इम्तेहान लेते वो हमारा
पर्चा भी हम दे और जाच भी हम करे

मुस्कुराके आयेंगे जनाब बहानों का गुलदस्ता लिए हुए
ये भी याद नहीं पिछली बार यही बहाना था

वादा-ए-रस्म उन्हें निभाना आएगा भी या नहीं
या हम रूठना और वो मनाना इस खेल के नियम बनेगे

मयूर पंख मैं लाई हूँ

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कैसे सुना तुम्हे हालदिल
मैं ज़रा सी घबराई हूँ
तुम जो खफा हो अचानक
मैं ज़रा सी कतराई हूँ |
जज़्बात मेरे मचल रहे है
कैसे बयाँ करूँ मैं इनको
तुम्हे जो मैं भेज रही हूँ
कैसे सज़ा उस खत को |
कुछ अपने लहू से लिख दूं
या फिर अश्को के मोती रख दूं
मन इतना उलझ गया है
या फिर कोरी पाती भेज दूं |

सूरज की किरानो से लिख दूं
या चाँद की रौशनी छिड़क दूं
मन को कोई खबर नही
या तारों की चुन्नर जोड़ दूं |

अपने प्यार की नीव है गहरी
जैसे कोहरे में धूप सुनहरी
इश्क़ की बदरी को बरसाने
अब मयूर पंख मैं लाई हूँ |

शाम सुहानी सी

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शाम सुहानी सी

धूप की चादर को हटाकर बिखर गये नीले स्याह से बादल
गरजत बरसात बूँदों का आना ,गालों पर सरका आँख का काजल |

ठंडी हवाओं का नज़दीक से गुज़रना नस नस में दौड़ती सहर
आँधियों का हमे अपने आगोश में लेना दिल में उठता कहेर |

उसी राह से हुआ तेरा आगमन ,एक छाते में चलने का निमंत्रण
नज़दीकियों में खिला खिला मन फिर भी था खामोशी का अंतर |

यूही राह पर कदम चले संग तुम्हारे कभी ना आए वो मंज़िल
बड़ी अजीब सी चाहत ,ख्वाब होते गजब के जो इश्क़ में डूबा हो दिल |

दरवाज़े तक तेरा हमे छोड़ना और मुस्कान में कुछ कोशीशन कहेना
समझ गया दिल वो अनकहे अल्फ़ाज़ और चलते हुए तेरा तोडसा रुकना |

हमशी  कह दू राज़ की बात ,ज़िंदगी की सब से थी  वो शाम सुहानी सी
रब्बा  शुक्रा में जीतने सजदे करूँ कम है उस  वक़्त तूने दुआ कबुल की |

उस गली के मोड़ पर

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तेरे दर्द में सनम हम रह लेंगे 
इश्क़ में हुए हर सितम सह लेंगे 
दूर ही सही मगर दिल के करीब हो 
तेरे आने की आस है खुद से कह देंगे  |

———————-

अक्सर सवाल करते हो किस बात में छिपी है खुशी हमारी
इतना  समझ पाए अपनी तो जन्नत है मुस्कान तुम्हारी |

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संगीन गुनाह हुआ है  हमसे जमाने की नज़र में
कहते है कम उमर में  कैसे तुमसे इश्क़ कर बैठे  |

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बहुत संभ कर ही चलते है राहसफ़रकदम
उस गली के मोड़ पर यकायक तुमसे टकरा जाते है |

एक तेरा एक मेरा

एक तेरा एक मेरा

खिलतें है हज़ारों गुलाब
जब आते हो तुम साजन
फ़िज़ायें भी बहकने लगती है
कर खुशबू का रुख़ मेरे आँगन
महसूस होती है दूर से ही
खुशियों की चहल पहल
तेरे आने से पहले ही दस्तक देते
अरमानो की होती है हलचल
मेरे तरह सब तुझ से
मिलने को मचलते है
तेरी कदमों की आहट होने तक
बड़ी मुश्किल से खुद को संभालते है
तेरी बाहों में सिमट जाउँ
वही तो है मेरा जहां सारा
धड़कते है,दो दिल मिलते है वही
एक तेरा एक मेरा |

मोहोब्बतें

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मोहोब्बतें

आँखों से आँखों का फलसफा कहती
खामोशियों में भी मदहोश सी बहती
मोहोब्बतें बन अफ़साना हमारे दिल में रहती
क्यों बदलासा लगता है फ़िज़ायों का वही मौसम
क्यों अपनासा महसूस होता है पराया मन
खुद से भी ज़्यादा उनकी तासीर होती
अदा में शर्माने की तालीम होती
गालों पे लट का गहना सजता
दीवाना दिल पल पल बहका सा मिलता
कैसा जुनून कैसा नशा  जो उतरता नही
तन एक जहाँ में मन बादलों में कही
रब्बा कोई दवा खास बनाई तूने गर
मत देना हमे कभी माँगे भी तो
रहना चाहूं यूही बेहोश पूरे सफ़र |

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