उस गली के मोड़ पर

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तेरे दर्द में सनम हम रह लेंगे 
इश्क़ में हुए हर सितम सह लेंगे 
दूर ही सही मगर दिल के करीब हो 
तेरे आने की आस है खुद से कह देंगे  |

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अक्सर सवाल करते हो किस बात में छिपी है खुशी हमारी
इतना  समझ पाए अपनी तो जन्नत है मुस्कान तुम्हारी |

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संगीन गुनाह हुआ है  हमसे जमाने की नज़र में
कहते है कम उमर में  कैसे तुमसे इश्क़ कर बैठे  |

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बहुत संभ कर ही चलते है राहसफ़रकदम
उस गली के मोड़ पर यकायक तुमसे टकरा जाते है |

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कायनात झुक जाएगी

कायनात झुक जाएगी

हबीब-ए-सुलताना तेरा अक्स देखा था पानी में
ऐसा हुस्न-ए-माहताब पहेले न देखा ज़िंदगानी में |

सितारों की चुनर ओढ़ जो निकलेगी हूर-ए-जन्नत
कायनात झुक जाएगी छूने लब-ओ-गुल रवानी में |

मल्लिका-ए-दीदार-ओ-दिल नामुमकिन है यहा
शब-ओ-महक छोड़े वो अपनी कदम-ए-निशानी में |

जंजीर-ए-इश्क़ में क़ैद कर लिया है खुद को
रहनुमा गुस्ताखियाँ हो माफ़ हुई गर नादानी में |

कहते है लोग ये इश्क़

कहते है लोग ये इश्क़ top post

कहते है लोग,ये इश्क़ आग का दरिया होता है |
कैसे कहे,के इश्क़,किसिके दिल तक पहुँचने का ज़रिया होता है ||

कहते है लोग,ये इश्क़ एक आँधी लाती है |
हमे तो इश्क़ से,गिली मिट्टी की खुशबू,सौन्धि सौन्धि आती है ||

कहते है लोग,ये इश्क़ समंदर से भी गहरा होता है |
कैसे बताए,के इश्क़ में,हर पल एक नया सवेरा होता है ||

कहते है लोग,के इश्क़ में,कदम कदम पर संभालना होता है |
कैसे बताए,के इश्क़ में, दो दिलो को मिलकर,एक राह पर चलना होता है ||

कहते है लोग,के इश्क़ में,माँगनी होती एक मन्नत है |
कैसे समझाउ, के इश्क़ करना , हमारे लिए एक जन्नत है ||

कहते है लोग,ये इश्क़,किसी और की अमानत होती है |
कैसे कहे सबसे,ये इश्क़,खुदा की दी हुई एक नेमत होती है ||