ज़िंदगी

Image and video hosting by TinyPic

लंबी सी रील के जैसी लगे
मानसपटल के कैमेरे में क़ैद

एक लम्हे का सफ़र ज़िंदगी |

=========================

शायद बहुत कुछ खोया ज़िंदगी
एक बस साया सी, तू  जुदा न हुई

तुझे समझने का मौका ,किस्मतवालो कोही तो मिलता है |

Advertisements

तुमसे हूँ मैं और मुझसे हो तुम – ज़िंदगी

Image and video hosting by TinyPic

तुमसे हूँ मैं और मुझसे हो तुम वरना तो सब अधूरा 
यही लफ्ज़ बार बार मूड कर हमसे ज़िंदगी कहेती है | 

 

 

सुनो तुम मेरा गीत और मैं तुम्हारी धड़कन में बस जाउँ
बन जाए ऐसी धुन जिस में जीवन की नदिया मिलती है | 

 

 

साँसों में उसकी खुशबू घुली सी , ज़ुबान पर बन मिठास
आँखों में नमकिन सा पानी का झरना बन के रहती है | 

 

 

वैसे  कदम से कदम मिलाकर चलती ,पल पल का बंधन
जब  ज़रूरत महसूस होता साथ,तो  नज़रों से छिपती है | 

 

 

पशेमा पशेमा हो ये मन ढूंढता है उसे अंधेरो उजालो में
किसी कोने से झाकति ,मंद मुस्काती खिलती,बहती है |

 

 

 

 

 

 

 

 

चाह कर भी रूक नही सकता

चाह कर भी रूक नही सकता अमर वो वक़्त हूँ
छाया मिले निज संसार मैं धूप खड़ा दरख़्त हूँ
सब कुछ पाकर भी चैन कहा भागती है हसरते
 ज़ीले मन मर्जी  लौट ने वाला लम्हा फक़्त हूँ |

सबल,सजल,सरल

सबल,सजल,सरल,सढल,सुगंधा,स्वस्तिका
बेड़ियाँ को तोड़ कदमो ने ढूंढी है नयी दिशा |

ममतामयी,कोमल हृदय,कनखर भी मैं नारी
वक़्त पड़े जब रक्षा करने बनू तलवार दो धारी |

बहेती रहूंगी हरियाली बिछाती पाने अपना लक्ष
अर्जित करूँ  इतनी आज़ादी कह सकु अपना पक्ष |

हर जीवन फलता फूलता जिस पे मैं हूँ वो शाख
सुलगती चिंगारी हूँ चाहूँ बुरी रस्मे हो जल के राख |

तेरे वजूद का एहसास

Image and video hosting by TinyPic

अपने आप में खोई,अकेली ही खड़ी थी | न जाने किस सोच में डूबी थी | 
लंबे घने गेसुओं को उसकी ,बहती हवा भी छूने को मचल पड़ी | कभी यूही 
ल़हेरा के छोड़ देती,कभी एक लट का टुकड़ा उसकी मुख मंडल पर रख देती | 
मगर वह  ईन अटखेलियों  से जुदा बनी रही | जान बुझ कर या अनजाने में
शायद उसे भी नही पता था | 

     सूरज की गुनगुनी धूप में उसका चहेरा जगमगा तो रहा था,मगर उस पर कोई 
भाव नही परावर्तित हो रहे थे | लगा एक कदम आगे बढ़कर क्यूँ न गुफ्तगू कर ले |
उसकी तल्लिनता भंग करने का साहस नही जुटा पाई | क्या वह खूबसूरत तराशा 
हुआ बुत मात्र है,जो जीवित हो कर भी सवेदना हीन होती है | नही ऐसी तो कोई बात 
नही लग रही |

  चाहे उसपर किसी और बात का असर न हो रहा हो,बदलते रुत का,मौसम के
 रुख़ का असर हो रहा था | जैसे उसके दिलदार का पैगाम हो उन में,और वह हर
बात सुनकर ,मुख की बदलती रंग छटा से  उसका जवाब दे रही हो |

   कही से अचानक ही रुई से लबालब बादल इकट्ठा होने लगे थे | उसके मुख की
रेखायें तनी सी खीची सी लगने लगी | हल्का गुलाबी गोरा रंग उनके काले स्याह
रंग में घुल गया | कुछ ज़ोर ज़ोर की आवाज़े और उसका बढ़ता तनाव,जैसे
सारे जहाँ की चीता में डूब गयी हो | ज़्यादा देर नही चला ये सब,किसी ने रुई की
फाहो को निचोड़ दिया होगा | उस में भरा पानी छम छम करता धरा की गोद में बहने
लगा | पैरों के नीचे से गुज़रते ठंडे स्पर्श ने उस पर सम्मोहन सा जगाया ,या सवेदना
का चुबक लगाया न जानू | वह मदहोश सी मुस्कुरा उठी |

    जब बादलों के पर्दों से किरनो का रथ निकला ,सारी सृष्टि पाचू के रंग सज गयी |
सुरभी के सुवास से मन पटल के द्वार खोल दिए | गगन का इंद्रधनु पूरे क्षितिज पर 
बिखर  पड़ा | फूलों पर जमी बूँदों में खुद को निहारती वह खिलखिला कर हस दी |
उसके हर बदलते रूप और भाव के साथ मैं भी जुड़ गयी थी अब तक | साथ कुछ पल
का ही ,एक रिश्ते में बदल गया हो जैसे | वो जैसी भी है मैं ने अपना लिया उसे | कभी
मासूम बच्चे सी ज़िद करती है,कभी अल्लड़ सी दौड़ती है,कभी समझदारी की बातें भी 
करती है | वो है तो मेरा ही हिस्सा | तुमसे मुझे प्यार है नाआशना | ज़िंदगी मुझे  
तेरे वजूद का एहसास है अभी |

कठपुतली का खेल

जनमानस सब जिंदा तो है

पर मन की भावनाए मरी हुई

बाहरी काया ही आकर्षित करती

आत्मा दबी,जैसे कठपुतली सजी हुई

किसिका किसीसे ना कोई लेना देना

बस अपनी ताल में नाच नाचना

खुद के लिए ही भला सोचना

स्वार्थ के लिए दूसरे को बेचना

कोई मुसीबत में है तो क्या ?

राम जाने,उसका क्या हो,खुद बचना

जो है आज की दौलत का कुबेर धनी

उसके साथ ही दोस्ताना बनता अपना

जाने किस दिन वो सूरज निकलेगा

होगा इंसान से इंसान का सच्चा मेल

वरना तो धागो से बंधे नाच रहे

जीवन का ये कठपुतली का खेल.

ताश सी ज़िंदगी

ताश सी ज़िंदगी

//1//
लगती है हमे कभी कभी
ये ज़िंदगी ताश की डी सी
इंसान सब ताश के पत्ते
खेल खेलता वो उपरवाला जी
मन में आया वो ताश दिखाया
ज़रूरत जिसकी वो पत्ता छिपाया
जब लगता अब हम जीत रहे है
तिकड़म चाल से फिर हराया
हम भी तो कुछ कम ऩही
हम में भी भरा जोश वही
खेलेंगे बाजी पल पल की
जब तक साथ उम्मीद कल की
कोई एक कोशिश सफल होगी ही
मन्झे हुए खिलाड़ी है हम भी |

//2//
सवाल पर सवाल खड़े ज़िंदगी के
ताश के उपर ताश रखे हो जैसे
हवा संग सदा ही उड़ते रहते है
जवाब ढूँढने उनके,पकड़े तो कैसे?

//3//
एक के उपर एक रचाया,सजाया
ताश का खूबसूरत बंगला बनाया
खुशियों के दरवाज़े और खिड़कियाँ
हँसी का खिलखिलता झूमर लगाया
एक  हवा का तेज मंडराता भवर
मेहमान बनकर अंदर तक आया
साथ ले गया सारे ताश के पत्ते
तब से हर कोने में मातम सा छाया |

//4//
ताश के पत्तो का ये खेल,सदियों से
हम भी पैनी नज़र से देख रहे है
हर ताश के साथ पीस पीस कर
जीतने की कला अब सिख रहे है |

//5//
तुम हो बादशाह  ल्तनत के
हम भी मुक़ाबले में कम ऩही
बेगम के खिताब से नवाज़े गये
चाहे ताश की दुनिया के सही |

मुक्ति

miniature_painting_kota.jpg

मुक्ति

1. भोर की लालिमा             
मन में असीम भक्ति
हाथों में पूजा थाल
तुलसी की परिक्रमा
मंत्रो का उच्चारण जाप
शन्खो का नीनाद
भजन स्तुति गा
प्रभु में विलीन हो जा
मुक्ति चिन्ताओ से |

2. नारी हूँ मैं
देवी का रूप हूँ मैं
जग की जननी हूँ मैं
ममता की मूरत हूँ मैं
समाज से पीड़ित हूँ मैं
पूजते है,जलाते भी है
अपनाते है,छलते भी है
सब की हूँ,मेरा स्वयं
अस्तित्व भूलते  है
हा आज चाहती हूँ मैं
मुक्ति दोगले विचारो से |

3. विशाल अंबर
बस यूही निहारूं
मन ही मन में
उसे छूकर 
पिंजरे में बंद हूँ
कैसे उड़ जा
आवाज़ दब गयी
आस तड़प बन गयी
स्वन्द उड़ना चाहूं
पंछी की आज़ादी पा
मुक्ति क़ैद से |

4. कालचक्र सदैव कार्यरत
ये जीवन पूर्ण ताहा जिया
अंतिम पड़ाव अब आया
अनकहा संदेसा संग लाया
मो जीने का और बढ़ाया
सच से किसने धोका खाया
आख़िर सबने इसे अपनाया
एक दिन जीवनधारा रूठेगी
सांसो की डोर कभी टूटेगी
सब कुछ खामोश
रह जाएगा सन्नाटा
अभिलाषा मोक्ष प्राप्ति की
मुक्ति जग से |

top post

काग़ज़ पर उतर कर आ जाओ तुम

तुम्हे अपनी ज़िंदगी बनाना चाहते है
मेरी सांसो में आकर मिल जाओ तुम |

तुम्ही फूल मेरे जीवन की बगिया का
मेरे दिल में आकर खिल जाओ तुम |

तुम्हारी इनायत है ,के अभी मैं जिंदा हूँ
मेरी धड़कन में आकर समा जाओ तुम |

तुम्हारा नाम सदा गुनगुनाती रहती हूँ
मेरी होठों का संगीत बन जाओ तुम |

तुम्हे इस जिगर में जान बनाया है
मेरी काया में आकर ठहर जाओ तुम |

तुम्हारी इबादत आजकल मैं करती हूँ
मेरी दुआ आकर कबुल कर जाओ तुम |

तुमसे ही मेरे जीवन के रेशम तार जुड़े
मुझसे आकर गठबंधन कर जाओ तुम |

तुम्हे मेरी शब्दो की भावना में लिख दू
अब काग़ज़ पर उतर कर आ जाओ तुम |

नये साल का नया पल

ये जो पल है चला जाएगा
एक पल में नया साल आएगा
पल भर में जो बदल जाए
उसको ही कहते जीवन |

नये साल की नयी हो किरने
जगमगाए लाखो दीप सुनहरे
पल भर में जहाँ रौशन कर जाए
एसे उजालो से भरलो मन |

नये साल में सुख दुखआएँगे
नयी राह पर चलते जाएँगे
पल भर में ढेरो खुशिया देंगे
एसा कर लो अपना प्रण |

नये साल में नयी हो आशा
नये साल की नयी सरिता
पल भर के लिए भी युद्ध नही
अपनी दुआ में माँगे अमन |

नये साल में खेत लहराए
नया रुख़ नदिया ले आए
कोई पल सूखा,बाढ़ ना हो
हरियाली से हो भरा चमन |

top post

« Older entries