दीप तुम जलते रहना यूही निरंतर

नन्हे से दीपक में सजाई बाती
रौशनी चारों तरफ,निखरी हुई ज्योति
हर पल तप तप कर तुम हो जाना प्रखर
दीप तुम जलते रहना यूही निरंतर |

अंधेरी गलियों में जो हम भटक जाए
तेरे उजियारे से मन की प्रज्वलित हो आशायें
मुश्किलें आए तो साथ निभाना शामसहर
दीप तुम जलते रहना यूही निरंतर |

तूफानो के काफ़िले आएंगे गुजर जाएंगे
कोशिश होगी तुम बुझ जा,चुभेंगी हवायें
विश्वास के बल पर  हो जीवन का सफर
दीप तुम जलते रहना यूही निरंतर |

अपने लौ को सदैव मध्यम ही जलने दो
प्रकाश पर खुद के कभी घमंड  हो
प्रेरणा बनो सबकीदिखाना राहनज़र
दीप तुम जलते रहना यूही निरंतर |

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हम तुम

हम तुम
अलग अलग
दो तन
एक मन
बाहों में
ये कंपन
हमारी तुम्हारी
बढ़ती धड़कन

हम फूल 
तुम खुशबू 
इन फ़िज़ायों संग
हो जाए रूबरू

हम घटा
तुम सावन
आओ बरस जाए
प्यासी धरती
तृष्णा मिटाए

हम दीप
तुम बाति
मिलकर जल जाए
प्यार की ज्योति
रोशन कराए

हम नींद
तुम ख्वाब 
कर ले सारे
अरमान पूरे
कोई सपने
ना रहे अधूरे

हम सुर
तुम गीत
छेड़े साज़
सजाए प्रीत
एक धुन
बन जाए मीत

हम वफ़ा
तुम कसम
आज निभाए
ये रसम
होंगे ना जुदा
सजनी साजन

हम तुम
एक रंग
सदा रहे
संग संग.

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