हसरतो के कमल मेरे

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हसतो के कमल

आओ आओ सखियों आओ,कुछ राज़ बताना चाहूं मैं 
दिल की बगिया में अब के ,नये गुल खिलाना चाहूं मैं  |
 
नींद में जब सोई हुई थी,सपनो में खोई हुई थी 
कोई अजनबी दबे पाव आया,उलझी टो को सुलझाया 
उसके लबों की पंखुड़ियों को,हौले मुझ पर बरसया 
गुलाबी निशानियाँ रात की,सुबह गालों पर पा मैं  |
  
  आओ आओ सखियों आओ,कुछ राज़ बताना चाहूं मैं 
दिल की बगिया में अब के ,नये गुल खिलाना चाहूं मैं  |
  
  वही है जिसको खोज रही थी,जिसके लिए सोच रही थी 
कही दूर  था वो मुझ से,उसको अपने दिल में ही पाया 
हसतॉ के कमल पर मेरे,प्यार की दव बूंदे सजाया 
मोहोब्बत  के मंदिर में उसके,खुद को अर्पण कर  मैं  |
  
  आओ आओ सखियों आओ,कुछ राज़ बताना चाहूं मैं 
दिल की बगिया में अब के ,नये गुल खिलाना चाहूं मैं  |

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उड़ जा पंछी भोर भई

अब तक तुम गहरी नींद सोए हुए हो
किन सच्चे झूठे सपनो में खोए हुए हो

वो कौनसी यादे है जो पीछा नही छोड़ती
वो कौनसी राहे है जो आगे नही बढ़ती

उन पुरानी यादों को तुम भुला दो
उन बेमानी बातों को तुम सुला दो

ख्वाबो और हवाओ में नही बनते महल
जिद्द पर तुम उतर आओ अगर
कीचड़ में भी खिल जाते है कवल

बस अपने धेय पर अटल रहना
दृढ़ निश्चय से जीवन लक्ष की और बढ़ना

जगाओ मन में आज,एक और नयी आशा
चूनलो अपने लिए,एक और नयी दिशा

कल की निशा के साथ,बीती बात गयी
उड़ जा रे पंछी , एक नयी भोर भई.

kamal ke phool

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कनक सी रवि किरनो से
पवन मखमली एहसास तले
मनमोहक झरना निर्मल सा
हरे पन्नो के बीच में
दो  कमल के फूल खिले
शामाल श्वेत रंग परिधान कर
बहते पानी के संग चले
एक बार भी नही हटी नज़र
नही भूले वो अपनी डगर
चलते रहे एक दूसरे की और
पाने को अपनी मंज़िल
जहाँ दो खूबसूरत दिल मिले
देखो ना,उन हरे पन्नो में
दो कमल के फूल खिले.