ख्वाहिशो के कारवाँ

1.आए है हम भी इस मोड़ पर  
   अपनी महक कुछ छोड़ जाए  
   इन ख्वाहिशो के कारवाँ में  
   कही हमारा भी नाम आए | 

2.हम अकेले ही चल रहे थे
    ज़िंदगी की राहेगुजर
   कारवाँ कब अपना हुआ, जानू
   और कोई आहट भी ऩही |

3.गुज़रते हुए वक़्त के साथ
   बढ गयी है ख्वाहिशे और भी
   गीत ,नज़्म ,ग़ज़लो का कारवाँ
   ज़िंदगी की राहो पे रुके ना कभी |

4.जुड़े तो है इस कारवाँ से
  ये ख्वाहिश बस पूरी हो जाए
  भीड़ में तन्हा  समझू ना खुदको
  दिल में क्यो ये ख़याल आए |

  

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khwaish

के झरोके  से झाकती और उठती
ख्वाहिशो की छोटी लहरें

हर दिन नया  लेकर आती है
देखती है ख्वाब संपूर्ण होने का
तितली सी बनती चंचल
पतंग बन आसमान में करती हलचल
कोई ख्वाहिश पूरी होती है
अपना नया चेहरा लेती है
बाकी बिखर जाती है
दिल के गलियारे में
गिरकर,हसती,खिलती फिर उमड़ पड़ती
नयी रूह लेकर
जुड़ जाती ख्वाहिशो के कारवाँ से
जो कभी थमता नही….