एक पुराना मौसम भीगा

दोस्तों में से ही किसीने ये कविता ईमेल से भेजी थी,हमे नाही कवी का नाम पता है,नाही ये कही और प्रकाशित हुई है क्या इस बात की कोई जानकारी ?बस मगर दिल को बहुत अच्छी लगी तो आप सब से बाट रहे है |
अगर किसी को इस कविता के लेखक के बारे में या और कुछ भी जानकारी हो जरूर बताए,आखिर सारा श्रेय उन्ही का है |

एक पुराना मौसम भीगा ,अनजानी बरसातों में
जाने लेकर कौन चला है , ओढ़ा बादल हाथों में |

इक मौसम में पतझड़ के दिन,इक मौसम में फूलों के
कितना सारा फर्क है आखिर ,तेरी ही सौगातों में |

अपनी आँखों में हर मंजर् , अब अनदेखा रहता है
कोई झील-मिल सी रहती है,ख्वाबों की बारातों में |

सब्र -आलम क्या होता है , यारो हम से पूच्छो तो
कतरा-कतरा शबनम चुनना, हिज्र की लम्बी रातों में |

चाहत है एक दिन अमीर बनू

चाहत है एक दिन अमीर बनू
सौ गुन वाला कड़वा नीम बनू |

ज़िंदगी का गहरा भंवर देखा
मोह से अनजान फकीर बनू |

दर्द बहुत दिए अपनो को
मरहम लगाता हकीम बनू |

झूठे आसुओं से लुटा जहाँ
मन को संभाले वो नीर बनू |

कर्ज़ कितना चढ़ा मिट्टी का
मर के भी अमर शहीद बनू |

भंवरों सी फूलों में छुपी ‘महक’
कंवल से खिला झील बनू |

कशिश

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कशिश खिचाव

या सिर्फ लगाव

मत पूछो

हमें नहीं मालूम

हाँ हाँ

दिल का गीत गुनगुनाते है

लफ्ज़ नहीं मालूम

पहली बार हुआ

खुद की धड़कन ,

धीमी रफ्तार नब्ज़ 

की चाल

नहीं पहचानी

कभी सुना भी

तो नहीं था

एक मोड़  ऐसा होगा

जहा हम गुमशुदा

और कोई दूजा अपना होगा …..

ये इश्क भी क्या क्या खता करवाता है

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ये इश्क भी क्या क्या खता करवाता है
महबूब -ओ-दिल पे शक की सुइयां दिखाए

माना उनसा इमानदार न कोई कायनात में
वक़्त के साथ चलना उन्हें आता नहीं

मुलाकात की जगह हम मौजूद पहले से
राह चलते लोगों की सवालिया नज़र का क्या जवाब दे

ये कैसा इम्तेहान लेते वो हमारा
पर्चा भी हम दे और जाच भी हम करे

मुस्कुराके आयेंगे जनाब बहानों का गुलदस्ता लिए हुए
ये भी याद नहीं पिछली बार यही बहाना था

वादा-ए-रस्म उन्हें निभाना आएगा भी या नहीं
या हम रूठना और वो मनाना इस खेल के नियम बनेगे

कभी तो ऐसा हो

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कभी तो ऐसा हो
नींद पलकों में सिमट जाते ही
ख्वाबों में तुम आ जाओ
हम कुछ कहने से पहले ही
मोहोब्बत की शमा जलाओ

कभी तो ऐसा हो
शाम अपने सिंगार खड़ी
टहल रही हो छत पे
हम आह्ट पहचाने तब तक
तुम देहलीज़ पार भीतर आओ

कभी तो ऐसा हो
खनके कंगन ,छुम छुम भागती पायल
जल्दी से काम निबटाये
एक दिन छुट्टी तुम भी लेलो
कोई रंगीन शरारत सिखलाओ ….

तुम्हारा प्रतिबिंब उतार लेती हूँ

सावन  के पानी में छप छप करना

किसी के मुख मुस्कान वास्ते जानबूझ

 कीचड़ में फिसलना

वो हर्ष के धब्बे  उठे मौजूद है

मन की काँच पर आज भी

 

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दूर नभ में स्थित हो

मन मचलता है तुम्हे पाने

थाली में पानी सजाकर

तुम्हारा प्रतिबिंब उतार लेती हूँ

उस में खुद को निहार के

चाँद और हमारा अक्स

ऐसे ही मिला लेती हूँ…..

तुम हमे यू ना भुला पाओगे

सुना है कल तुम चले जाओगे
ना जाने फिर कब लौट आओगे
जब भी चलेंगी ये मस्त हवाए
हमे तुम याद बहुत आओगे

अश्को को हमने छिपा दिया है
जुदाई पर भी तुम मुस्कुराओगे
एक ही गहरा सदमा काफ़ी है
हमे तुम और कितना सताओगे

वादा अब ये हमारा भी रहा
हम भी तेरे साथ ही रहेंगे
जिस अंजुमन तुम कदम रखोगे 
वहा हम फूल बनकर खिलेंगे

जिस राह भी तुम जाओगे
सब हमे ही तेरी मंज़िल कहेंगे
तेरे दिल को अपना घर बनाया
तुम हमे यू ना भुला पाओगे

नभ आए हमारे द्वार

पगले से मन को कौन समझाए
नील गगन में उँचा उड़ जाए 
हमे  छोड़ अकेला विहार करता
शायद तब थोड़ा सहमता डरता
वापसी की मन को राह दिखलाने
नभ आज  आए हमारे द्वार |

कह कर भी वो ना सुने किसी की
हरपल विचारधारा रखे  खुद की
कितना भी उसे जकड़ना चाहूं
मगर वो भागता ,यूही घूमता
वापसी की मन को राह दिखलाने 
नभ आज आए हमारे द्वार |

नही समझता वो जग की रीत
मिलकर रहना  यही है प्रीत
अकेला वो खुद में ही रमता
गगन की फाहो में छिप जाता
वापसी की मन को राह दिखलाने 
नभ आज आए हमारे द्वार |

hamari khud ki ek marathi kavita ” nabh aaj dari ale” ka anuwad karne ki koshish ki hai,phew,bahut mushkil tha ek bhasha se dusri bhasha mein arth sahit anuwad karna:)

एहसासों के समंदर में

एहसासों के समंदर में
उठती है विचारों की ल़हेरें
कभी मदमस्त बहती मंद मुस्काती
कभी रौद्र रूप ले कुछ कहती
तूफ़ानो के बवंडर में सुनाई नही देता
चिंतन , योग के किनारे पहरा देते है
उन्हे निगलकर , सब बंधन तोड़
उन्मुक्त सी निकल जाती है दिशाहीन
और बह जाते है हम भी 
साथ उनके बिन बुलाए ही….

रघुकुल रीति सदा चली आई

बचपन के वो दिन थे कितने सुहाने
कुछ भी कीमत दूं वापस कभी ना आने
कितनी अजब गजब थी वो छोटी सी दुनिया
हक़ीक़त में जहा उड़कर आती परीयाँ
देवगन सारे अच्छे ,बुरे थे सारे दानव
बर्फ की होती राजकुमारी,साथ बूटे मानव
सात समंदर पार से राजकुमार आता
सफेद घोड़े पर बैठ राजकुमारी ले जाता

शाम को सारे बच्चे कहते नानी –
राजारानी से शुरू और उन्ही पे ख़तम कहानी
दीप जलते ही वो दीपम करोती सुनाती
कहानी के साथ कुछ अच्छी बाते सिखाती

बुरा कभी ना सोच किसिका,सदा बनो नेक
राम रहिम येशू नानक सारे ये है एक
जो भी खुद के पास है बाट कर खाना
कभी ख्वाब में भी किसी का दिल नही दुखाना

ये सारे अच्छे बोल नानी बार बार दोहराई
एक बात वो हमे गा बाँधकर समझाई
राम कहत रघुकुल रीति सदा चली आई
चाहे प्राण जाए पर वचन ना जाई

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