ख़यालों में

 

ख़यालों में

 

 

 

जब तुम पास नही होते

 

 

या पास होकर भी दूर होते हो

 

 

तेरा ही ख़याल करती हूँ मैं

 

 

पलकों के पर्दे पर तेरा चित्र बनाती

 

 

उन में प्यार के रंग भर देती

 

 

बेहोशी का आलम , मैं तुझे निहारती

 

 

कभी तुम भी आकर देखो

 

 

हमारे ख़यालों में ,

 

 

तेरे लिए क्या सोचती हूँ मैं

 

 

कभी तुम भी मुड़कर देखों ,

 

 

तेरे ख़यालों में डूबी हुई

 

 

हक़ीक़त में कैसी लगती हूँ मैं |

 

 

 

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