ऐसा कब होगा

खुदा तेरी दुनिया में ऐसा कब होगा

 किसी को भूख लगे और  उसका मन रोगा

खुदा तेरी दुनिया में क्यूँ है इतने बीमार

कुछ लोग महलों में और कुछ क्यूँ लाचार

ये कब बदलेगा,कब सब समान होगा

सब को एक ही छत और सरी की रोटी तू कब देगा?

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खुदा-ए-अज़ीज

खुदाअज़ीज तेरे दर पे एक ही बड़ी चादर चढ़ाउँ तो काफ़ी होगी 
वक़्त के साथ तुझसे माँगनेवालों की दुआओं की फेहरिस्त लंबी होगी |

फूलों के बिस्तर उन्हे रास नही आया करते |


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

काटो से भरी राहे चुनकर जो चलते है अक्सर
फूलों के बिस्तर उन्हे रास नही आया करते |

इश्क़ की मुश्किल डगर जो थाम लेते एकबार
तूफ़ानो से डरकार वो वापस नही जाया करते |

जीवन की गहराई में जो सत्य रौशन कराए
झूठ के अंधेरो में वो कभी नही सोया करते |

खुदा की खुदाई पर जो जहन में भरोसा रखे
छोटिसी ठोकर से वो शक्स नही रोया करते |

रूह से रूह का रिश्ता जो जुड़ जाए कसम से
चाहे जनम बदल जाए वो टूट नही पाया करते |

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खुदा तेरी खुदाई की कसम तुझे

खुदा तेरी खुदाई की कसम

जूस्तजू है अदब से एक बार
रूबरू करा दे यार से एक बार |

रास्ते में टकराए है उनसे बहुत
निगाहे मिला दे बस एक बार |

उनसे तो हम कत्ल हो चुके
इज़हार-ए-इश्क़ का गुनाह करा दे एक बार |

खुदा तेरी दर का हज कर लिए
यार के दर पर सजदा करू एक बार |

खुदा तेरी खुदाई की कसम तुझे
मेरी दुआ कबुल , कह एक बार |

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