बोगन बेलिया

चाँदनी के फूलों से सजी मोगरे की डाली
झरते फूल हलके ही अन्जनी में समेटे

पूछ लिया पौधे ने ,कही तुम्हे चोट तो नही लगी?

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गुलाबी ,लाल रंगों की खिलखिलाहट
खुश्बू बस हम में खुशी ही है

ये बहार भी तेरे लिए,बोगन बेलिया चहकी

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हम तुम

हम तुम
अलग अलग
दो तन
एक मन
बाहों में
ये कंपन
हमारी तुम्हारी
बढ़ती धड़कन

हम फूल 
तुम खुशबू 
इन फ़िज़ायों संग
हो जाए रूबरू

हम घटा
तुम सावन
आओ बरस जाए
प्यासी धरती
तृष्णा मिटाए

हम दीप
तुम बाति
मिलकर जल जाए
प्यार की ज्योति
रोशन कराए

हम नींद
तुम ख्वाब 
कर ले सारे
अरमान पूरे
कोई सपने
ना रहे अधूरे

हम सुर
तुम गीत
छेड़े साज़
सजाए प्रीत
एक धुन
बन जाए मीत

हम वफ़ा
तुम कसम
आज निभाए
ये रसम
होंगे ना जुदा
सजनी साजन

हम तुम
एक रंग
सदा रहे
संग संग.

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