बोगन बेलिया

चाँदनी के फूलों से सजी मोगरे की डाली
झरते फूल हलके ही अन्जनी में समेटे

पूछ लिया पौधे ने ,कही तुम्हे चोट तो नही लगी?

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गुलाबी ,लाल रंगों की खिलखिलाहट
खुश्बू बस हम में खुशी ही है

ये बहार भी तेरे लिए,बोगन बेलिया चहकी

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मधु मुस्कान

मोह किसी भी चीज़ का होता है

मन अटकेलिया करता है

वो फूल से फूल मंडराती तितली

आँखें मिचे मधु चुराती

पर फेहराए तो प्रतीत हो

आस पास हज़ारों खुशियाँ लहरा रही हो

तब हम स्वार्थी हो जाते है

दिल में ये ख़याल आता है

वो उड़कर हमारी हथेली पर आए

और अपनी मधु मुस्कान हमे भेट कर दे

खुद पर फिर हंसी भी आती है

क्या हम इतने आलसी हो गये वक़्त के साथ

के खुशियाँ भी उधार की हो……

खुद से मिलना ज़रूरी होता है

दुनिया की भीड़ में खुद को ढालना  ज़रूरी होता है

 

दो पल बैठ किनारे कभी खुद से मिलना  ज़रूरी होता है |

 

 

 

दर्दधूप में जिगर जलते हुए हसना ज़रूरी होता है

 

जज़्बातों की बाढ़ बह जाए दिल से तब रोना ज़रूरी होता है |

 

 

 

उमरराहकदम में हमसफ़र होना ज़रूरी होता है

 

यहा सब को कुछ पाने के लिए कुछ खोना ज़रूरी होता है |