मनीप्लांट

 

मनीप्लांट

ख्वाहिशो की
पारदर्शक बोतल को
ख्वाबों के पानी से भर दिया
उम्मीद का एक
हरा पत्ता जड़ दिया

आकांक्षाओ का मनीप्लांट
देखो कैसे ल़हेरा रहा
उँचा उँचा चढ़ेगा
जिधर राह मिल जाए

सब देखेंगे उसको
बढ़ते हुए
वाह वाह होगी

जड़ों में अटकी हुई
रिश्तों की
सौंधी मिटटी को
पानी में घोल दिया
खुद से दूर……..

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कौन हो नूरे-जिगर

कौन हो नूरेजिगर कोई मोह्पाश हो
हकते दिल में खिला प्यार पलाश हो |

खीची चली आती हूँ उसी मकाम पर
मुश्किल से मिलती वो बूँद आस हो |

शाहेसमंदर कब का रीता हो चुका
बुझती ही नही कभी अजीब प्यास हो |

तुमसे दूर जाउँ ये ख़याल सितम ढाए
जिस में जकड़ना चाहूं एसे बन्द्पाश हो |

जमाने से छुपाना और जताना भी है
नवाजिश करूँ सब से हसीन राज हो |

परदा उठाओ अब,के बेसब्र दिल हुआ
या पलकों में सजता बस ख्वाब हो. |

ख्वाब

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ख्वाब

अँखियों की  पलकों में समाए ये रहते
मन में छिपी बातों को हमसे ये कहते
कुछ स्याह कुछ इंद्रधनु से रंगीन ये ख्वाब |

नींद में कितने बन जाते ये अपने से
खुल जाए जो चक्षु  हो गये पराए वे
कुछ पाकर कुछ हाथों से ओझल ये ख्वाब |

ख्वाबों में जीना अक्सर ज़रूरी होता है
समझ कर उन्हे पाना मुश्किल होता है
दिखाते है अरमानो को मंज़िल ये ख्वाब |

ख्वाबो पर अपना हर पल निर्भर ना हो
अक्स छोड़ परछाई दिखाए वो दर्पण ना हो
कुछ खिलते कुछ खुद से बोझिल ये ख्वाब |

तेरे कदमो के निशान

रात रात भर करटे बदलते नज़र आये
तेरी यादों के साये बेवक़्त हमे सलते है |

दुनिया की सच्चाई से रिश्ता तोड़ लाए
तुझसे मिलनके ख्वाब में हम पलते है |

तुझ तक पहुँचना अब मुश्किल ना रहा
तेरे कदमो के निशान पर हम चलते है |

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