हाइकू – सवेरा

हाइकू – सवेरा

1. पंछीयो की किलबिल
    सूरज निकलते ही
    घरौंदा छोड़े

2. चाँद छुप गया
    चँदनी खो गयी
    अधूरे स्वप्न

3. दव की बूँदे
    फूल खिले है
    महेकती ताज़गी

4. घना सा कोहरा
   पत्तियों का जाल
   चमकी किरने

5. अरुण रथ दौड़ा
    एक नया दिन
    रौशन जहाँ

6. अख़बार के पन्ने
    चाय का प्याला
    तरोताज़ा दिन

7. प्रभु का नाम स्मरण
    शंख का नीनाद
    आशीर्वाद पाए

8. रंगो की चुनरी
    अंबर भी शरमाये
    भोर हुई

9. भीगे है गेसू
   गालो पे लट है
   मनमोहक अदा

10. काम पे जाना
    अपनो से दूर
     ज़िंदगी है

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फ़िज़ा

फ़िज़ा

यूँ ही आज ख़याल आया , देखु रूप पलटकर
कुछ पल महसूस करू , फ़िज़ा में बदलकर |

फ़िज़ा बनकर मैं , आज़ाद हो चुकी थी
इस ज़मीन से अपना रिश्ता खो चुकी थी |

हवाओं संग कही भी झूमती जा रही थी
पीछे पीछे मेरे , महकती ताज़गी आ रही थी |

घटाओं संग आसमान की सैर करने निकलती
कभी पंछी सी उड़कर , किलबिल करती चहेकती \

शाम को थक कर , जब ढूँढा अपना तिकाना
कही भी नज़र ना आया मेरा आशियाना |

जैसी थी वैसी अच्छी , फ़िज़ा बन भटकना दर बदर है
समझ गयी मैं, आसमान नही , ये ज़मी मेरा घर है |

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