तहु बाँसुरिया बजाओ कन्हाई

तहु बाँसुरिया बजाओ कन्हाई
राधा रानी छेड़त साज़

भगवन महू तोरी प्रीत अपनाई
संसार की मोहे कौनू चिंता नाही
मोहे चरण में बसैले बनाकर दास
तहु बाँसुरिया बजाओ कन्हाई
राधा रानी छेड़त साज़ |

महू  जग की सूदबुद खो बैठी
महू तोसे इक जिद्द कर  बैठी
मोहे लागी  तोसे मिलन की आस
तहु बाँसुरिया बजाओ कन्हाई 
राधा रानी छेड़त साज़  |

महू पूजा की रीत ना आई
जहु मन भावे ,भजन मा गाई
मोहे लागी तोरे दर्शन की प्यास
तहु बाँसुरिया बजाओ कन्हाई 
राधा रानी छेड़त साज़ |

top post

Advertisements

काहे तूने मटकी तोड़ी

काहे तूने मटकी तोड़ी

वृंदावन में फिर एक नयी सुबह खिली
सारी गोपिया पनिया भरन को चली

राह भर बतियाती इतराती चलती
कान्हा के गुणगान,शराराते बयान करती

दूर कही से नटखट कान्हा आए
कंकर से मटकी पर निशाना लगाए

एक ही वार में सारी मटकी फोड़ी
गोपिया पूछती,काहे तूने मटकी तोड़ी

यशोदा मैय्या को,शिकायत करवाएँगी
कान्हा को रस्सी से बन्धवाएँगी

कान्हा कहे,गोपियों मैं तुमसे रूठ जाउ
कसम से अब कभी बाँसुरी ना बजाउ

यह सुनकर गोपिया घबराए
बिन बाँसुरी रासलीला कैसे रचाए

सारी सखियाँ कान्हा को मनाए
नटखट चाहे तू हमे रोज़ सताए

बीनती करती ,बासुरी रोज़ बजाए
मधु धुन से सारे ब्रिज को सजाए.

top post

यमुना के तट पर

यमुना के तट पर
गोपियों का जमघट
वस्त्राभूषण रख कर
जलक्रीड़ा करती सब.
नटखट कान्हा आए
छुपता दबे पाव तब
देखे गोपिया है मगन
शरारत करने मचला मन
वस्त्राभूषण के साथ
एक पेड़ पर छिप गया
बहोत देर बाद
गोपियों के ध्यान आया
कान्हा को सब पुकारती
वस्त्राभूषण वापस दो कहती
हम सब बाहर कैसे आएँगी
नंदनवन वापस कैसे जाएँगी
कान्हा बोले मैं मान जाउ
पर अपनी एक शर्त मनाउ
यशोदा मैय्या से शिकायत ना करना
चाहे जितना मैं माखन चुराउ
मंज़ूर कह गोपिया शरमाई
नन्हा कान्हा,पर धूम मचाई.