मयूर पंख मैं लाई हूँ

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कैसे सुना तुम्हे हालदिल
मैं ज़रा सी घबराई हूँ
तुम जो खफा हो अचानक
मैं ज़रा सी कतराई हूँ |
जज़्बात मेरे मचल रहे है
कैसे बयाँ करूँ मैं इनको
तुम्हे जो मैं भेज रही हूँ
कैसे सज़ा उस खत को |
कुछ अपने लहू से लिख दूं
या फिर अश्को के मोती रख दूं
मन इतना उलझ गया है
या फिर कोरी पाती भेज दूं |

सूरज की किरानो से लिख दूं
या चाँद की रौशनी छिड़क दूं
मन को कोई खबर नही
या तारों की चुन्नर जोड़ दूं |

अपने प्यार की नीव है गहरी
जैसे कोहरे में धूप सुनहरी
इश्क़ की बदरी को बरसाने
अब मयूर पंख मैं लाई हूँ |

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सितारे हज़ारों नक़ाब बदलते है

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तुम्हे देख  हमनशी कदम खुद  खुद चलते है
बड़ी मुश्किल से जज़्बादिल हमसे संभलते है |

मिलने तुझ से सातो समंदर भी पार कर जाएँगे
महफूज़ रखेंगे तेरे साए हमे ये सोच  निकलते है |

अंधेरों का ख़ौफ़ नही रहा जिगरजान को हमारी
मोहोब्बत के गवाहचिराग रौशन होके जलते है |

महबूबआफताबजहन के राज़ –ख़यालात यहाँ
वो भी महजबीदिलकशी से मुलाकात हो मचलते है |

फलकआईने से निगाहे निसार  नही होती गुलशन आरा
आपकी आरज़ू में झिलमिल सितारे हज़ारों नक़ाब बदलते है. |

न जाने क्यों

 जाने क्यों

वो ये कैसे सोच लेता है के
उसके हर जज़्बात हमारा दिल समझता है
साथ होकर भी तरन्नुमखामोशी का साज़
हमे हरदम नागवारा लगता है
कहेने को बीच में अनगिनत बातें राह देखती
वो बस कभी आसमान  को कभी हमे तकता है
हालातआलम बदलते नज़र नही आते
छेड़ो ना वही आलाप जो रूह में बसता है
 जाने क्यूँ डरती हूँ तुमसे आशिक़ –हयात
अनकहा सा ये लम्हा रेत सा फिसलता है |

कुछ दिल से

कुछ दिल से 

१. वैसे तो आपकी हर अदा से वाकिफ़ है दिलदारा 
   डरते है जब इश्क़ में इम्तेहान  देने की बात हो |

२. जब तक न तुमसे बातें हो दिल-ए-ग़ुरबत सुकून नही पाता 
   बार- २ दोहराओ वादा-ए-इश्क़,तब तक उसे यकीन नही आता |

३. बैचेनियों के तूफान क्यों उठते है दिल में हर वक़्त 
    तेरी एक नज़र बस ,इत्मीनान से थम जाया करते है |

४. रात की नींद भी सुहानी बने जो तू ख्वाब में आ जाए
     कोई सवाल मुश्किल नही ज़िंदगी का जो तू जवाब दे जाए |

५. तेरी मुस्कान को देख कर,हम भी रोज हंस लेते है
    तुझ से बातें करने संगदिल मगर बहुत तरस जाते है | 

बादल मितवा

राह देखे मन प्रतिपल हर क्षण
ढूँढे तुझे मेरा बिखरा कन कन

नही सुने जाते जमाने के ताने
उस पर  आने के तेरे लाख बहाने

आँखें है बंजर ,कैसे नीर बहाए
सुलगती किरने आकर तनमन जलाए

तुझसे मिलने करूँ सागर का मंथन
धरा हूँ , मुझे है उड़ने का बंधन

ब्रम्‍हांड में पूरे तेरा है विस्तार
मुक्त अकेला ही करता है विहार

सुन रहे हो क्रंदन मत सता रे
कुछ लम्हो की साँसे अब तो आरे

मोहोब्बत का वास्ता तुझे धड़कन पुकारे
बादल मितवा प्यार की बूंदे बरसा रे.

नादान दील

ये दील अक्सर नादान हरकतें करता है
अचानक ही धड़कना भूल जाया करता है
याद नही रखता अब कुछ और तेरे सिवा
हमारा होकर हमसे बेईमानी करता है |

पहला प्यार

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पहला प्यार  

 

जब भी देखूं तुम्हारी आँखों में
याद आते हैं वो गुजरे गुलाबी लम्हें
पहला प्यार जो हमारी ज़िंदगी में आया
उन हसीन घड़ियों में ,हमने तुम्हें पाया

 बरसातों के खुशनुमा मौसम
कुछ भीगे तुम, कुछ भीगे से हम
राह से चलते-चलते अनजाने से टकराए
ठंड से कपकपाते बदन, थोड़े से सहेराए
चहेरे से टपकती बूंदें, गालों पर लटों की घटायें
नयना मिले नयनों से, हम दोनों मुस्कुराए
सिमटकर अपनी चुनरी, शरमाये निकल गये थे।

घर पहुँचे लेकर तेरे उजले से साए
पलकों में बंद होकर साथ तुम भी चले आए
मुलाक़ातों के फिर शुरू रोज़ सिलसिले
दिल-ओ-जान हमारे, सदा ही रहे मिले
रेशम डोर से बँधकर, मिलकर ख्वाब सजाए
प्यार, समर्पण के भावना से गीत रचाए
तुम्हारे होने से जीवन के नज़रिए बदल गये थे।

इतना वक़्त जो तुम संग बिता लिया
हर लम्हा जिया वो था नया-नया
गुलशन-ए-बहार में खुशियों के फूल खिलाए
संभाला तुम्हीं ने हमें ,कभी कदम डगमगाए
सिखाया तूफ़ानो का सामना करना
संयम से अपने अस्तित्व को सँवारना
प्यार की गहराई के असली मायने समझ गये थे |

गुलाबी लम्हों को रखा संजोए
मन में उनको पल पल दोहराए
क्या पहला प्यार फिर हो सकता है?
होता है, आज मुझे हुआ है
दोबारा तुमसे…..

http://merekavimitra.blogspot.com/2008/03/blog-post_5284.html

खामोशियाँ भी तेरी

खामोशियाँ भी तेरी दिल को है गवारा अज़ीजजानशीन 
के किस्सा– मोहोब्बत तेरी आँखों से बयान हो जाता
दिलनादान को लगती है चोट,वो रोता भी है कभी कभी
समझाना उसे आसान होता,गर लफ़्ज़ों का मरहम मिल पाता |

गुलदस्ता – मोहोब्बत का(valentine)

 

गुलदस्ता – मोहोब्बत का

[1]
फ़िज़ा के रंग कुछ सवरने लगे है
हवाओं के रुख़ कुछ बदलने लगे है
सुस्त सी सर्दियों पर बिछी सूरज की रश्मि
दिल में तम्मनाओ के काफिले निकलने लगे है
मौसम में छाई है बसंती बहार
मंन में सज रहा मोहोब्बत का खुमार
पपिहरा नये गीतों से वादियाँ चहेकाना तुम 
सावरिया आए मिलन जब,ये राज़ किसे ना बताना तुम |

[2]

मोहोब्बत ये तुम्हारी हमारी
सदियों सी हो चाहे पुरानी
इतने अरसो बाद भी सजना
हम हर लम्हा बुनते नयी कहानी
बरकरार रखी है वही खुमारी
बावरी मैं हूँ तेरी दीवानी
तुम संग जो चली हूँ राहइश्क़
खुद को समझू सबसे सयानी. |

[3]

मोहोब्बत की घड़ियाँ ज़िंदगी में आए
सारी कायनात बदल ने का दस्तूर है |

इंसान को मसीहा का तसवुर दिया
इतना गहरा मोहोब्बत का सरूर है |

आस पास का सब कुछ बेमानी लगे अब
बेवक़्त उनका ख़याल दिल में हुज़ूर है |

इबादात करते है सौ बार दिन में
पाकजज़्बे पर हमे बहुत गरूर है |

नफ़रतॉ के खार दिल से रुखसत हुए सारे
इश्क़ –गुल का हम पर ये असर ज़रूर है |

[4]

खामोशियों से की कई बार कोशिश
बयान करे तुम से अपने मोहोब्बत का अफ़साना
दिलबर हुए हो जब से दिल के सरताज
महफ़िलचमन  हमे लगे और सुहाना
मिल जाते हों राहों में कभी अकेले
दो बातें कर लेते है तुझ से
की है मुश्किलें ज़रासी आसान
तेरा साथ पाने का मिला यही  बहाना. |

[5]

मोहोब्बत के सफ़र में ,कुछ पल रुक जाए
प्यार के महकते गुलाब आज फिर ले आए
चाँदनी ने की है रौशन सारी फ़िज़ाए
आफताब-ए-गवाह को भी संग बुलाए
तुम मेरी साँसों को महसूस करो दुबारा
तेरी धड़कने सुनू मैं,यूही गुज़रे वक़्त सारा
कुछ तुम कहो,कुछ हम कहे,कभी खामोश नज़ारा
पल पल मिलकर सजाए,बहेती जीवन धारा |

HAPPY VALENTINE DAY

 

रब्बा दीदार करा दे

रब्बा दीदार करा दे

रब्बा ये मुझे क्या हुआ है
शायद इश्क़ का बुखार चढ़ा है |

रब्बा मैं सूद बुद खो बैठी
अक्सर मैं बेहोश हूँ रहती |

रब्बा क्यूँ मुझे नींद ना आए
किसकी याद है,जो मुझे सताए |

रब्बा क्यूँ मन उलझ गया है
सबने हमे दीवानी कहा है |

रब्बा कौन है वो काफ़िर बता दे
मिलने जिससे दिल भी रज़ा है |

रब्बा जो मर्ज़ मुझे दिया है
उसके दिल को वही सज़ा दे |

रब्बा अब तो दीदार करा दे
दर्द दिया है , तूही वा दे |

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