पवन बासूरी

पवन बासूरी

भोर की रंगों से सज़ा गगन
सुनहरी रश्मि का  आगमन
कीलरव से चहेका चमन
अंगड़ाई ले जागा मधुबन
अध खुले अध खिले  सुमन
शरारत भरी थोड़ी चुभन
पंखुड़ियों पर रेशम छूअन
पुलकित रोमांचित करता तनमन
बासूरी पर छेड़ी प्रीत गुंजन
प्यार महकाता नटखट पवन 

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आज जाने की ज़िद्द ना करो

आज जाने की ज़िद्द ना करो

लगता है जैसे अरसो पुरानी बात है
गमो के साये सदा हमारे साथ है |

तमस की वो बेबसी,और वो तन्हाई
तरस गया मन सुनने,स्वरो की शहनाई |

महलो में रह कर भी, दामन खाली थे
दिपो की माला थी,पर रास्ते बंद थे |

तुम्हे ढूँढने तो , आसमान भी झुक गये
जहा छोड़ी थी राह , हम वही रुक गये |

आज मेरे सरताज , जो तुम आए हो
प्यार के मधुबन , अपने साथ लाए हो |

सोला शृंगार किये , मेरे मंन की बात हरो
प्रियतम,आज जाने की जिद्द ना करो |

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