उमस भरी दोपहरी में

उमस भरी दोपहरी में
गर्मी की चादर ओढ़े धूप टहल रही थी
वो बादल का टुकड़ा आया
झाक के देखा उसने, आँखों के सूखे मोती
दौड़ा भागा , कुछ आवाज़ लगाई
लू से भारी हवा ठंडक बन लहराई
छाव का शामियाना धरा पर सज़ा
हज़ारों बादलों का जमघट जो लगा
टापुर टापुर बूंदे बड़ी बड़ी झूमको सी
राह पर गिरती , माटी से मिलती
खिड़की खुलने से पहले ही
नयनो के रास्ते मन बाहर था
आवारा बरसातो में भीगता
धूल गया पूरा के पूरा
चमकता नयी कोरी स्लेट सा
नयी हरियाली के उगम में
खुद को समेटता……….

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दो हाइकू

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सुबह की पायल खनकते ही,निशा की गोद से उठकर
हम अक्सर उनकी गोद में समा जाते है | बिन कहे ही
वो कुछ ऐसी खुशबू ले आती है,की बस,दिल खुश हो जाता है |
उस खुशबू के बिना तो पैरों के पहिए चलते ही नही |

 . चाय की चुस्की
    तेरी हाथों से बनी
     दिन सुहाना

उपरवाले ने भी ये ममता की मूरत बड़ी फुर्सत में बनाई होगी |
इतनी सहनशीलता,प्रेम,निस्वार्थ,त्यागी, और  जाने हमारे 
एहसास उन तक मिलो दूर से भी कैसे पहुँच जाते है | दिल जान 
लेता है , लफ़्ज़ों की ज़रूरत ही महसूस नही हुई कभी |

   मेरे मन के
    राज़ अनकहे से
    कैसे समझी

सच ही तो कहते है जहा उपरवाला नही जा सका,उसने मा भेज दी |

मन पखेरू उड़ जा

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मन पखेरू उड़ जा

मन पखेरू उड़ जा लै  कोई संदेस
बरस पर बरस बीत रहे पिया भए परदेस |

मिलते ही उनसे ये कहना
तुझ बिन मुश्किल है अब रहना
दिल रे , तू धर ले उनकी धड़कन का भेस 
मन पखेरू उड़ जा लै  कोई संदेस |

यादों से भी हुई है अनबन
छोड़ गयी हमे बना के बिरहन
एक नज़र मिलाउँ उनसे , कोई इच्छा ना शेष
मन पखेरू उड़ जा लै  कोई संदेस |

चिट्ठी में लिख लाना उनकी बातें
साथ लै आना मोहोब्बत की सौगाते
उसके सिवा मन तुझ को काया में नही प्रवेश
मन पखेरू उड़ जा लै  कोई संदेस |

गुलमोहर

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 सी शीश है तुझमें ,खिची चली आती हूँ
साथ मेरे मन की तरंगे, तुमसे बाटने  लाती हूँ |

तुमसे मेरा रिश्ता है , मेरे बचपन सा सुहाना
तेरे रंगरूप से मोहित मैं,सुनती हूँ तेरा तराना |

फ़िज़ाओं का रंग बदले,मौसम भी बदलता रेहता
जब तूमपे बहा सजती,मेरा रोम रोम है खिलता |

ग्रीष्म ऋतु में आते हो,सावन की ख़ुशी दे जाते हो
जहाँ भी जाती हूँ मैं,मेरे मन में समाए होते हो |

ना जानू तुम कौन हो मेरे,प्रियतम या सखा हो
बेनाम ही रेहने दो ये रिश्ता,नाम में क्या रखा है |

इतना समझती हूँ मैं,बरसों का अपना अफ़साना
 जब भी तेरी छाया में,हरदम प्यार के फूल बरसाना |

ज़िंदगी की  मुश्किल राहों में , तेरे फूल चुन चुन लाती हूँ
तेरे संग होने के एहसास से ही,कितना सुकून पाती हूँ |

लालरे फूलपन्नो की चुनरी से,तेरा रूप ग़ज़ब का निखरता है
मेरे दिल के आँगन में आज भीवो गुलमो बिखरता  है |

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