एक पुराना मौसम भीगा

दोस्तों में से ही किसीने ये कविता ईमेल से भेजी थी,हमे नाही कवी का नाम पता है,नाही ये कही और प्रकाशित हुई है क्या इस बात की कोई जानकारी ?बस मगर दिल को बहुत अच्छी लगी तो आप सब से बाट रहे है |
अगर किसी को इस कविता के लेखक के बारे में या और कुछ भी जानकारी हो जरूर बताए,आखिर सारा श्रेय उन्ही का है |

एक पुराना मौसम भीगा ,अनजानी बरसातों में
जाने लेकर कौन चला है , ओढ़ा बादल हाथों में |

इक मौसम में पतझड़ के दिन,इक मौसम में फूलों के
कितना सारा फर्क है आखिर ,तेरी ही सौगातों में |

अपनी आँखों में हर मंजर् , अब अनदेखा रहता है
कोई झील-मिल सी रहती है,ख्वाबों की बारातों में |

सब्र -आलम क्या होता है , यारो हम से पूच्छो तो
कतरा-कतरा शबनम चुनना, हिज्र की लम्बी रातों में |

कही कुछ तो

कही कुछ तो

पहले तो हमे छूकर
गुजरनेवाला हवा का हर झोका
मधुर बातें कहता
पल पल की खबर देता
बावरा सा आगे पिछे
झूम झूम के बहता
अब पास से गुज़रे भी 
बनता अनदेखा अनजाना
नाही कोई करता बहाना
खुलेआम नज़र अंदाज़ी
वजह नही मालूम
कही कुछ तो मौसम में
बदलाव आया है

इत्तेफ़ाक

इत्तेफ़ाक

उन्ही लम्हों का तोहफा दिया जिन्हे हम दफ़ना चुके थे
    ख़ुदारा  कसम से,तेरे ये इत्तेफ़ाक भी बड़े अजीब होते है |

. बहका है मौसम लेकर अंगड़ाई,उसपर चुभती ये तन्हाई
    काश हक़ीक़त में तेरे आने का खूबसूरत इत्तेफ़ाक हो जाए |

गुलदस्ता – मोहोब्बत का(valentine)

 

गुलदस्ता – मोहोब्बत का

[1]
फ़िज़ा के रंग कुछ सवरने लगे है
हवाओं के रुख़ कुछ बदलने लगे है
सुस्त सी सर्दियों पर बिछी सूरज की रश्मि
दिल में तम्मनाओ के काफिले निकलने लगे है
मौसम में छाई है बसंती बहार
मंन में सज रहा मोहोब्बत का खुमार
पपिहरा नये गीतों से वादियाँ चहेकाना तुम 
सावरिया आए मिलन जब,ये राज़ किसे ना बताना तुम |

[2]

मोहोब्बत ये तुम्हारी हमारी
सदियों सी हो चाहे पुरानी
इतने अरसो बाद भी सजना
हम हर लम्हा बुनते नयी कहानी
बरकरार रखी है वही खुमारी
बावरी मैं हूँ तेरी दीवानी
तुम संग जो चली हूँ राहइश्क़
खुद को समझू सबसे सयानी. |

[3]

मोहोब्बत की घड़ियाँ ज़िंदगी में आए
सारी कायनात बदल ने का दस्तूर है |

इंसान को मसीहा का तसवुर दिया
इतना गहरा मोहोब्बत का सरूर है |

आस पास का सब कुछ बेमानी लगे अब
बेवक़्त उनका ख़याल दिल में हुज़ूर है |

इबादात करते है सौ बार दिन में
पाकजज़्बे पर हमे बहुत गरूर है |

नफ़रतॉ के खार दिल से रुखसत हुए सारे
इश्क़ –गुल का हम पर ये असर ज़रूर है |

[4]

खामोशियों से की कई बार कोशिश
बयान करे तुम से अपने मोहोब्बत का अफ़साना
दिलबर हुए हो जब से दिल के सरताज
महफ़िलचमन  हमे लगे और सुहाना
मिल जाते हों राहों में कभी अकेले
दो बातें कर लेते है तुझ से
की है मुश्किलें ज़रासी आसान
तेरा साथ पाने का मिला यही  बहाना. |

[5]

मोहोब्बत के सफ़र में ,कुछ पल रुक जाए
प्यार के महकते गुलाब आज फिर ले आए
चाँदनी ने की है रौशन सारी फ़िज़ाए
आफताब-ए-गवाह को भी संग बुलाए
तुम मेरी साँसों को महसूस करो दुबारा
तेरी धड़कने सुनू मैं,यूही गुज़रे वक़्त सारा
कुछ तुम कहो,कुछ हम कहे,कभी खामोश नज़ारा
पल पल मिलकर सजाए,बहेती जीवन धारा |

HAPPY VALENTINE DAY

 

आई है बसंत बहार

 

 आई है बसंत बहार

सर्द हवाए सुस्ताने लगी
कोहरा भी धुआँ धुआँ
कनक सी कीरने जाल बुनती
कोयल गात नीत राग मल्हार
के अब आई है बसंत बहार |

हर शाख पत्तियो से सजी
बेल हरियाली लहराने लगी
गुलमोहर का चमन खिला
कोयल गात नीत राग मल्हार
के अब आई है बसंत बहार |

झूलो की लंबी कतार
चहेरे पर हँसी फुहार
सखियो संग नचू मनसे
कोयल गात नीत राग मल्हार
के अब आई है बसंत बहार |

फुलो की महक छाई
समीरा मंद मंद बहे
पिहु की पाती लाए
कोयल गात नीत राग मल्हार
के अब आई है बसंत बहार |

मेघा बरसो रे आज

मेघा बरसो रे आज

मौसम बदल रहा है ,एक नया अंदाज़ लाया
बहती फ़िज़ायो संग रसिया का संदेसा आया
आसमान पर बिखरे सात रंग
रोमांचित,पुलकित,मैं हूँ दन्ग
भिगाना चाहूं इन खुशियों में तनमन से
मेघा बरसो रे आज बरसो रे |

वादीया भी तुमको,आवाज़ दे रही है
हवाए लहेराकर अपना साज़ दे रही है
घटाओ का जमघट हुआ है
रसिया का आना हुआ है
भीगना चाहती हूँ रसिया की अगन मे
मेघा बरसो रे आज बरसो रे |

हरे पन्नो पर बूँदे बज रही है
मिलन की बेला मैं अवनी सज रही है
थय थय मन मयूर नाच रहे है
पूरे हुए सपने,जो अरसो साथ रहे है
भीगना चाहती हूँ,प्यार के सावन में
मेघा बरसो रे आज बरसो रे |