ये इश्क भी क्या क्या खता करवाता है

Image and video hosting by TinyPic

ये इश्क भी क्या क्या खता करवाता है
महबूब -ओ-दिल पे शक की सुइयां दिखाए

माना उनसा इमानदार न कोई कायनात में
वक़्त के साथ चलना उन्हें आता नहीं

मुलाकात की जगह हम मौजूद पहले से
राह चलते लोगों की सवालिया नज़र का क्या जवाब दे

ये कैसा इम्तेहान लेते वो हमारा
पर्चा भी हम दे और जाच भी हम करे

मुस्कुराके आयेंगे जनाब बहानों का गुलदस्ता लिए हुए
ये भी याद नहीं पिछली बार यही बहाना था

वादा-ए-रस्म उन्हें निभाना आएगा भी या नहीं
या हम रूठना और वो मनाना इस खेल के नियम बनेगे

Advertisements

सितारे हज़ारों नक़ाब बदलते है

Image and video hosting by TinyPic

तुम्हे देख  हमनशी कदम खुद  खुद चलते है
बड़ी मुश्किल से जज़्बादिल हमसे संभलते है |

मिलने तुझ से सातो समंदर भी पार कर जाएँगे
महफूज़ रखेंगे तेरे साए हमे ये सोच  निकलते है |

अंधेरों का ख़ौफ़ नही रहा जिगरजान को हमारी
मोहोब्बत के गवाहचिराग रौशन होके जलते है |

महबूबआफताबजहन के राज़ –ख़यालात यहाँ
वो भी महजबीदिलकशी से मुलाकात हो मचलते है |

फलकआईने से निगाहे निसार  नही होती गुलशन आरा
आपकी आरज़ू में झिलमिल सितारे हज़ारों नक़ाब बदलते है. |