रुपहली किरनो से सजाया जो आसमान

रुपहली किरनो से सजाया जो आसमान
चाँद के बिन सितारे अधूरे  से लगते  है |

समंदर की गहराई में छुपाया जो खजाना
मोतियो  के बिन सीप अधूरे से लगते है |

इज़हार करने जाओ जो गमजमाना
आसुओ के बिन नयन अधूरे से लगते है |

महफ़िल में सजाओ जो गीतो का तराना
सुरताल  के बिन साज़ अधूरे से लगते है |

तुम हमे कितनी अज़ीज़ कैसे करे बयान
महक‘  के  बिन फूल अधूरे से लगते है |

Advertisements

ग़ज़लो की दीवानी

booknfeather.gif 

   ग़ज़लो की दीवानी

आज कल पग पग निशानी
मैं बस ग़ज़ल सोचती जाउ
किसी पल तुम देखो मुझको
मैं बस ग़ज़ल तलाशती पाउ |

ना जाने ये कैसा खुमार है
मुझे इससे कब इनकार है
ग़ज़ल  बन रहा मेरा जीवन 
मुझे इससे अब इकरार है |

जिस गली भी लगा शामियाना
तखलूस हो रही ग़ज़ल जहा पर
कही और ढूँढने की नही ज़रूरत
मुझे भी तुम पाओगे वहा पर |

दिल से सुनती हूँ ग़ज़ल को
दिल से अपनाती हर लफ्ज़ को
भारी उर्दू अल्फ़ाज़ जो ना समझू
दिल से कोई अर्थ लगाती उनको |

हम तो बस इतना ही जानते
शेर जोड़ कर ग़ज़ल है बुनते
काफिया,बहर,मतला,रदिक
ये  सब हम  नही  समझते |

हम  भी  ये सब  सीखना चाहे
ताकि खालिस ग़ज़ल लिख पाए
हम भी खुदकी  महफ़िल सजाए
और ग़ज़लो की दीवानी कहलाए.|

top post

तेरी पायल की रुनझुन

तेरी पायल की रुनझुन

दिल में हलचल कराती है
दिल में मीठे सुर सज़ाती है
दिल से गीत सुनाती है
दिल को महफ़िल बनाती है
तेरी पायल की ये रुनझुन |

दिल में तेरी याद लाती है
दिल से तुझे बुलाती है
दिल के मिलन को तरसाती है
दिल से तुझे अपना मीत बनाती है
तेरी पायल की ये रुनझुन |

दिल में दीप जलाती है
दिल की राहे रौशन कराती है
दिल को अपनी लौ से पिघलाती है
दिल में प्रीत जगमगाती है
तेरी पायल की ये रुनझुन |

पास  हो  तुम  सदा  मेरे , ये एहसास  कराती है
तेरी पायल की ये रुनझुन,कई हसरते जगाती है |

top post

mehfil

महफ़िल मे बुलाकर पूछते हो
के हमारा मिज़ाज़ कैसा है
हम जहाँ,वहीं सज़ जाती है महफ़िल
अपना तो आलम ही कुछ ऐसा है