बूँद में छीपा अस्तित्व

बूँद में छिपा अस्तित्व ढुंढ़ो तो मिल जाए
बूँद से मिलती आशा  सब की प्रेरणा बन पाए |

बूँद विश्वास की गहरे रिश्ते की नीव रचाए
बूँद प्यार की मिठास घोले नफ़रत के शूल मिटाए |

बूँद सा छोटा शब्द  भावनाओ को राह दिखाए
बूँद ही  खुशी और गम में आँखों को सजाए |

बूँद थिरकती पत्तियों पर जश्नसाज़ सुनाए
बूँद बूँद मिलकर बनता विशाल सागर सा समुदाय |

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एक तेरा एक मेरा

एक तेरा एक मेरा

खिलतें है हज़ारों गुलाब
जब आते हो तुम साजन
फ़िज़ायें भी बहकने लगती है
कर खुशबू का रुख़ मेरे आँगन
महसूस होती है दूर से ही
खुशियों की चहल पहल
तेरे आने से पहले ही दस्तक देते
अरमानो की होती है हलचल
मेरे तरह सब तुझ से
मिलने को मचलते है
तेरी कदमों की आहट होने तक
बड़ी मुश्किल से खुद को संभालते है
तेरी बाहों में सिमट जाउँ
वही तो है मेरा जहां सारा
धड़कते है,दो दिल मिलते है वही
एक तेरा एक मेरा |

अपना समझ के

बहुत कुछ कह देते है आपको हम अपना समझ के
ख़ता गर हुई कोई कभी माफ़ करना नादान समझ के
लफ़्ज़ों और जज़्बातों का ताल मेल बिखर जाए जो
सहना भी मुस्कुराना भी तुम हमे अनजान समझ के |

सबल,सजल,सरल

सबल,सजल,सरल,सढल,सुगंधा,स्वस्तिका
बेड़ियाँ को तोड़ कदमो ने ढूंढी है नयी दिशा |

ममतामयी,कोमल हृदय,कनखर भी मैं नारी
वक़्त पड़े जब रक्षा करने बनू तलवार दो धारी |

बहेती रहूंगी हरियाली बिछाती पाने अपना लक्ष
अर्जित करूँ  इतनी आज़ादी कह सकु अपना पक्ष |

हर जीवन फलता फूलता जिस पे मैं हूँ वो शाख
सुलगती चिंगारी हूँ चाहूँ बुरी रस्मे हो जल के राख |

अभिलाषा

गर्भ कोष की गहराई में
एक बीज आकार ले रहा
हौले हौले जोड़ रहा है
सवेदना की पंखुड़ियों को
खूबसूरत कली पर अपनी
किसी की नज़र न पड़े
इसलिए अंधेरे के जाल बुनता है
पता नही कैसे खबर मिलती है
उनको,शायद महक पहुँचती होगी
झुंड में आजाते है मिलकर
नोचने ,खरोचने को
असंख्य वेदना,दबी चीख
और लहू के  नदी बहती है
खून की होली खेलने का आनंद
हर चेहरे पर साफ लिखा
गर्भ खामोश,एक सिसकी भीं
नही भर सकता,
एक ही अभिलाषा थी  मन में
उसका फूल खिलता,
पूरे जहाँ को चमन बनाता
वो लहू का लाल रंग ही
अनगिनत खुशिया लाता
मगर उसने सोच लिया है अब
और नही ज़ुल्म सहेना
बंद कर लिए है अपने दरवाज़े
तब तक नही खुलेंगे
जब तक अपनी बेजान पंखुड़ियों को
जीवन दान देकर सशक्त चमन का
निर्माण न कर ले….

पहली बूँद

पहली बूँद

आज इस वक़्त गर्मी से अलसाया मौसम भीग रहा है | बरसात की बूँदों ने
अपना गीत छेड़ दिया | छन छन सी प्यासी धरती पर नाच रही है वो बूँदें |
और भीग भीग कर मद मस्त हुए मन के मयूर पंख पसारे स्वागत कर
रहे है बदलाव का |

   ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो ,खुशियों की हवायें अपना रुख़ हमारी और
बदल रही है | तन पर गिरती हर बूँद , जाने मन को भी किन किन 
हसीन यादों में भीगा रही है | वो मीठे एहसास फिर उभर कर आते है |

   माटी की सौंधी सी खुशबू तेरा ही पैगाम देती है | उसी की तरह तुम भी
हमारी साँसों में बसे हो | वही खिड़की,वही कोफ़ी का कप,वही मस्ताना
र्रिमझिम सा गीत,वही तेरी बातों और हँसी की याद |बहुत दूर हो हमसे 
तुम ,क्या सुन रहे हो दिल के साज़ ? पगली कहते हो हमे तुम,वही सवाल 
बार बार करती हूँ, जानती हूँ समझ जाते हो तुम अनकहे ही इस दिल के राज |

मोहोब्बतें

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मोहोब्बतें

आँखों से आँखों का फलसफा कहती
खामोशियों में भी मदहोश सी बहती
मोहोब्बतें बन अफ़साना हमारे दिल में रहती
क्यों बदलासा लगता है फ़िज़ायों का वही मौसम
क्यों अपनासा महसूस होता है पराया मन
खुद से भी ज़्यादा उनकी तासीर होती
अदा में शर्माने की तालीम होती
गालों पे लट का गहना सजता
दीवाना दिल पल पल बहका सा मिलता
कैसा जुनून कैसा नशा  जो उतरता नही
तन एक जहाँ में मन बादलों में कही
रब्बा कोई दवा खास बनाई तूने गर
मत देना हमे कभी माँगे भी तो
रहना चाहूं यूही बेहोश पूरे सफ़र |

तेरे होने का एहसास

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नींद की लहरों में
ख्वाबों के समंदर से उठ कर

रौशनी की चाह जगाता हुआ

चमचमाती चाँदनी शुभ्रा सा

घुलता है मन के गहराई में

तेरे होने का एहसास

ऑस की बूँदों में
मखमल की पंखुड़ियों पे खिल कर

खुद में ही भिगता हुआ

गुलाब से लम्हो को जीता

मिलता है दिल के साज़ में

तेरे होने का एहसास
 

अजीब सी राहें

अजीब सी राहें

ज़िंदगी में कितनी
अजीब सी राहें शामिल है
तुम भी गुज़रे उनपर
हम भी चले है
दुआयें माँगी उसकी
दरबार में,बुल हुई
नेमतमुलाकात में
तेरे निशान मिले है |

अंधेरे से उजाले तक

है ना बहुत गहरा अंधेरा है,
तेरे आसपास का कुछ भी
दिखाई नही दे रहा
झुंझलाहट,क़ैद का आभास
अंधेरों में गुम होती आवाज़े
कोई रोशनदान भी नही
अगर तुम महसूस करोगे
सब की हालत तेरे जैसी है
कोई मद्दत के लिए नही आएगा
इधर उधर टुकूर -२  क्या देख रहे हो
मैं हूँ,तुम्हारे अंदर का चिराग
थोडिसी हिम्मत कर,जलाओ मुझे
धुआँ उठेगा,साँस चढ जाएगी
पर साथ थोड़ी रौशनी भी आएगी
वही तुम्हे राह दिखाएगी
अंधेरों से उजाले तक का
तुम्हारे अस्तित्व का सफ़र
तय करने के लिए….

 

 

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