रसीली मिठास

बहुत दिनो बाद, शायद बहुत सालों बाद किसी ने घर पर खेत के गन्ने भेजे | गन्ने हो और मुह में पानी ना आए,
ऐसा हो ही नही सकता | झट से एक उठाया और अपने सो कॉल्ड मजबूत दातों पे भरोसा कर , छीलने की कोशिश
शुरू कर दी | पर बचपन की प्रॅक्टीस वो भूल चुके थे | सारा मुह छील गया, मगर गन्ना नही | आखिर बड़े,वज़नदार
चाकू से ये काम तमाम हुआ |
मीठे ,रसीले होते छोटे टुकड़े, दातों तले दब कर मिठास घोलने लगे , ज़बान से, गले तक,और गले से आत्मा तक |
कोई पूछे शहद से मीठा कुछ है, हाँ है,गन्ने को चूस के खाने का मज़ा:) |
बचपन में खेतों में दौड़ते, दातों से बड़े बड़े गन्ने छीलते,खाते, सारी मस्ती दिमाग में हुल्लड़ मचा रही है |
हाइवे पर गन्ने से लदे ट्रक में से गन्ने भी खिचे थे तब | आज गन्ने है पर वो उधम नही | फिर भी यादों में रसीली मिठास
मिली हुई है |

Advertisements

shabdh

शब्दो का है निराला जहाँ
शब्दो का संसार बस्ता वहाँ
शब्दों के घर में,मे भी हूँ रहती
शब्दों के माध्यम से अपनी भावनाए कहती
शब्द कभी होते है फूलों से कोमल
शब्द कभी बन जाते,पत्थर से कठोर
शब्द कभी होते , जैसे शीतल सा झरना
शब्द कभी शोर,जैसे बारिश की बूँदो का गिरना
शब्द कभी आग और जलन बनकर आए
शब्द कभी लुभावनी हरीयाली बनकर छाए
शब्दो के मीठे सुर,सबको है प्यारे
शब्द जो दुख देते,हम करते उन्हे किनारे
शब्दों से सजाया तीर,संभलकर चलाना
शब्दों से हो घायल कोई,बन जाती दूरिया
शब्द हो ऐसे,जो हर दिल में खिल जाए
शब्द वहीं बोले, जो चीनी दूध सी मिठास लाए.