बोगन बेलिया

चाँदनी के फूलों से सजी मोगरे की डाली
झरते फूल हलके ही अन्जनी में समेटे

पूछ लिया पौधे ने ,कही तुम्हे चोट तो नही लगी?

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गुलाबी ,लाल रंगों की खिलखिलाहट
खुश्बू बस हम में खुशी ही है

ये बहार भी तेरे लिए,बोगन बेलिया चहकी

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