ख्वाबों का आशियाँ

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नीली झील की सतह पर झूलता है वो जहाँ
हमारी मोहोब्बत से सज़ा  ख्वाबों का आशियाँ 

सूबह की सुनहरी किरने करती नृत्य झंकार
पवन हिचकौले , तन मन डोले ,छेड़े सुर सितार

रंग बिरंगी फूलों में थिरकन रचती फिर प्रीत
दिल की ल़हेरॉं में सिरहन  तू आए जो मधु मीत

 

पलकों के परदों में बंद है सारे पल -ए- गुलशन
तुमसे है साँसे सरगम, तुमसे ही साज़ –ए- धड़कन

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तुम्हारे लिए

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वादा नही कर रही हूँ कोई तुमसे
क्यूंकी वादों की उमर बड़ी छोटी होती है
टूटने की खनक भी सुनाई नही देती
सारे सपने भी संग ले जाती है
चाहत का इरादा बाँध लाई हूँ
दिल में तुम्हारे लिए
ईरादों की डोर बड़ी पक्की होती है |

कसम नही लूँगी कोई तुमसे ना ही दूँगी
क्यूंकी इश्क़ तो घुल गया फ़िज़ा में
कितने समय तक निभा पाउँगी
कोई हिसाब नही दे सकती
हर कदम साथ रखेंगे इस ज़मीन पर
ये रस्म निभाउँगी तुम्हारे लिए
रस्मो से रिश्ते का एहसास होता है |

कीमती तोहफे नही ला पाई कभी
क्यूंकी किम्मत से दिल नही खरीदे जाते
मुरादें गर वक़्त पर पूरी ना हो
दरमियाँ के फ़ासाले फिर भर नही पाते
एक गुलाब देने की हैसियत रखती हूँ
महक जिसकी सिर्फ़ तुम्हारे लिए
जो यादों में बस कर सदा पास रहती है |

इन फूलों की बारिश में

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इन फूलों की बारिश में
भीग लेते है हम भी
मोहोब्बत के इत्र की महक
जरा बदन पर चढा लूँ
अगले मौसम तक फिर
ये ताजगी रहेगी मन में .
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रिझाने प्रियतम फूल को,गुनगुनाया,बहलाया
खिली हर पाखी जब नाजुक प्रेम स्पर्श सहलाया
जज्बातों में बह के अपना मधुरस दे बैठा
मेरी मन तितली तो बस खुशबु की दीवानी है |

ye chitra humne kisi ke blog se liya hai,blog ka naam yaad nahi,unka shukran.

मोहोब्बत की वादियों में

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मोहोब्बत की वादियों में
तेरे साथ चलते हुए सफ़र आसान है
सोचती हूँ हम दोनो दिल से जुड़े 
अलग पहचान कहा हमारी
ना जाने अचानक तुम
कहा गुम होते हो
हमारे साथ होकर भी तन्हाई
खोजते हो ……..
ऐसा क्यों .? हमे बताओगे
इसका जवाब दे पाओगे ….

एक तेरा एक मेरा

एक तेरा एक मेरा

खिलतें है हज़ारों गुलाब
जब आते हो तुम साजन
फ़िज़ायें भी बहकने लगती है
कर खुशबू का रुख़ मेरे आँगन
महसूस होती है दूर से ही
खुशियों की चहल पहल
तेरे आने से पहले ही दस्तक देते
अरमानो की होती है हलचल
मेरे तरह सब तुझ से
मिलने को मचलते है
तेरी कदमों की आहट होने तक
बड़ी मुश्किल से खुद को संभालते है
तेरी बाहों में सिमट जाउँ
वही तो है मेरा जहां सारा
धड़कते है,दो दिल मिलते है वही
एक तेरा एक मेरा |

मोहोब्बतें

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मोहोब्बतें

आँखों से आँखों का फलसफा कहती
खामोशियों में भी मदहोश सी बहती
मोहोब्बतें बन अफ़साना हमारे दिल में रहती
क्यों बदलासा लगता है फ़िज़ायों का वही मौसम
क्यों अपनासा महसूस होता है पराया मन
खुद से भी ज़्यादा उनकी तासीर होती
अदा में शर्माने की तालीम होती
गालों पे लट का गहना सजता
दीवाना दिल पल पल बहका सा मिलता
कैसा जुनून कैसा नशा  जो उतरता नही
तन एक जहाँ में मन बादलों में कही
रब्बा कोई दवा खास बनाई तूने गर
मत देना हमे कभी माँगे भी तो
रहना चाहूं यूही बेहोश पूरे सफ़र |

सितारे हज़ारों नक़ाब बदलते है

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तुम्हे देख  हमनशी कदम खुद  खुद चलते है
बड़ी मुश्किल से जज़्बादिल हमसे संभलते है |

मिलने तुझ से सातो समंदर भी पार कर जाएँगे
महफूज़ रखेंगे तेरे साए हमे ये सोच  निकलते है |

अंधेरों का ख़ौफ़ नही रहा जिगरजान को हमारी
मोहोब्बत के गवाहचिराग रौशन होके जलते है |

महबूबआफताबजहन के राज़ –ख़यालात यहाँ
वो भी महजबीदिलकशी से मुलाकात हो मचलते है |

फलकआईने से निगाहे निसार  नही होती गुलशन आरा
आपकी आरज़ू में झिलमिल सितारे हज़ारों नक़ाब बदलते है. |

न जाने क्यों

 जाने क्यों

वो ये कैसे सोच लेता है के
उसके हर जज़्बात हमारा दिल समझता है
साथ होकर भी तरन्नुमखामोशी का साज़
हमे हरदम नागवारा लगता है
कहेने को बीच में अनगिनत बातें राह देखती
वो बस कभी आसमान  को कभी हमे तकता है
हालातआलम बदलते नज़र नही आते
छेड़ो ना वही आलाप जो रूह में बसता है
 जाने क्यूँ डरती हूँ तुमसे आशिक़ –हयात
अनकहा सा ये लम्हा रेत सा फिसलता है |

मन पखेरू उड़ जा

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मन पखेरू उड़ जा

मन पखेरू उड़ जा लै  कोई संदेस
बरस पर बरस बीत रहे पिया भए परदेस |

मिलते ही उनसे ये कहना
तुझ बिन मुश्किल है अब रहना
दिल रे , तू धर ले उनकी धड़कन का भेस 
मन पखेरू उड़ जा लै  कोई संदेस |

यादों से भी हुई है अनबन
छोड़ गयी हमे बना के बिरहन
एक नज़र मिलाउँ उनसे , कोई इच्छा ना शेष
मन पखेरू उड़ जा लै  कोई संदेस |

चिट्ठी में लिख लाना उनकी बातें
साथ लै आना मोहोब्बत की सौगाते
उसके सिवा मन तुझ को काया में नही प्रवेश
मन पखेरू उड़ जा लै  कोई संदेस |

कुछ दिल से

कुछ दिल से 

१. वैसे तो आपकी हर अदा से वाकिफ़ है दिलदारा 
   डरते है जब इश्क़ में इम्तेहान  देने की बात हो |

२. जब तक न तुमसे बातें हो दिल-ए-ग़ुरबत सुकून नही पाता 
   बार- २ दोहराओ वादा-ए-इश्क़,तब तक उसे यकीन नही आता |

३. बैचेनियों के तूफान क्यों उठते है दिल में हर वक़्त 
    तेरी एक नज़र बस ,इत्मीनान से थम जाया करते है |

४. रात की नींद भी सुहानी बने जो तू ख्वाब में आ जाए
     कोई सवाल मुश्किल नही ज़िंदगी का जो तू जवाब दे जाए |

५. तेरी मुस्कान को देख कर,हम भी रोज हंस लेते है
    तुझ से बातें करने संगदिल मगर बहुत तरस जाते है | 

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