बादल मितवा

राह देखे मन प्रतिपल हर क्षण
ढूँढे तुझे मेरा बिखरा कन कन

नही सुने जाते जमाने के ताने
उस पर  आने के तेरे लाख बहाने

आँखें है बंजर ,कैसे नीर बहाए
सुलगती किरने आकर तनमन जलाए

तुझसे मिलने करूँ सागर का मंथन
धरा हूँ , मुझे है उड़ने का बंधन

ब्रम्‍हांड में पूरे तेरा है विस्तार
मुक्त अकेला ही करता है विहार

सुन रहे हो क्रंदन मत सता रे
कुछ लम्हो की साँसे अब तो आरे

मोहोब्बत का वास्ता तुझे धड़कन पुकारे
बादल मितवा प्यार की बूंदे बरसा रे.

कायनात झुक जाएगी

कायनात झुक जाएगी

हबीब-ए-सुलताना तेरा अक्स देखा था पानी में
ऐसा हुस्न-ए-माहताब पहेले न देखा ज़िंदगानी में |

सितारों की चुनर ओढ़ जो निकलेगी हूर-ए-जन्नत
कायनात झुक जाएगी छूने लब-ओ-गुल रवानी में |

मल्लिका-ए-दीदार-ओ-दिल नामुमकिन है यहा
शब-ओ-महक छोड़े वो अपनी कदम-ए-निशानी में |

जंजीर-ए-इश्क़ में क़ैद कर लिया है खुद को
रहनुमा गुस्ताखियाँ हो माफ़ हुई गर नादानी में |

ऐसी हर सहर कीजिए

ऐसी हर सहर कीजिए 

नींद खुले देखूं तुम्हे ऐसी हर सहर कीजिए 
दिल में छुपाए कुछ राज़ हमे खबर कीजिए | 

पैगाममोहोब्बत भेजा है खत में नाज़निन
बुल हो  गर तोहफाइश्क़ हमसे नज़र कीजिए | 

खुशियाँ बाटने यहा चले आएँगे अनजान भी
किसी के गम में शरीक अपना भी जिगर कीजिए | 

आसान राहों से जो हासिल वो भी कोई मंज़िल हुई
खुद को बुलंद करने तय  मुश्किल सफ़र कीजिए | 

दुश्मनजहाँ के तोड़ रहे है मंदिर मज़्ज़िद
अपने गुनाहो की माफिएअर्ज़  अब किधर कीजिए | 

लहू के रिश्तों से भी मिले अब फरेब – खंजर
परायों से अपनापन नसीब वही बसर  कीजिए | 

ज़मीन समेट्ले बूँदो से वो बादल है प्यासा
आसमान झुके पाने जिसे  प्यार इस कदर कीजिए | 

गुलाब से सजाए लम्हे भी मुरझाएंगे कभी
यादों में उनकी “महकरहे ऐसा असर कीजिए |

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

नादान दील

ये दील अक्सर नादान हरकतें करता है
अचानक ही धड़कना भूल जाया करता है
याद नही रखता अब कुछ और तेरे सिवा
हमारा होकर हमसे बेईमानी करता है |

पहला प्यार

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पहला प्यार  

 

जब भी देखूं तुम्हारी आँखों में
याद आते हैं वो गुजरे गुलाबी लम्हें
पहला प्यार जो हमारी ज़िंदगी में आया
उन हसीन घड़ियों में ,हमने तुम्हें पाया

 बरसातों के खुशनुमा मौसम
कुछ भीगे तुम, कुछ भीगे से हम
राह से चलते-चलते अनजाने से टकराए
ठंड से कपकपाते बदन, थोड़े से सहेराए
चहेरे से टपकती बूंदें, गालों पर लटों की घटायें
नयना मिले नयनों से, हम दोनों मुस्कुराए
सिमटकर अपनी चुनरी, शरमाये निकल गये थे।

घर पहुँचे लेकर तेरे उजले से साए
पलकों में बंद होकर साथ तुम भी चले आए
मुलाक़ातों के फिर शुरू रोज़ सिलसिले
दिल-ओ-जान हमारे, सदा ही रहे मिले
रेशम डोर से बँधकर, मिलकर ख्वाब सजाए
प्यार, समर्पण के भावना से गीत रचाए
तुम्हारे होने से जीवन के नज़रिए बदल गये थे।

इतना वक़्त जो तुम संग बिता लिया
हर लम्हा जिया वो था नया-नया
गुलशन-ए-बहार में खुशियों के फूल खिलाए
संभाला तुम्हीं ने हमें ,कभी कदम डगमगाए
सिखाया तूफ़ानो का सामना करना
संयम से अपने अस्तित्व को सँवारना
प्यार की गहराई के असली मायने समझ गये थे |

गुलाबी लम्हों को रखा संजोए
मन में उनको पल पल दोहराए
क्या पहला प्यार फिर हो सकता है?
होता है, आज मुझे हुआ है
दोबारा तुमसे…..

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लफ़्ज़ों का सज़ा कर नगमा

त्रिवेणी

1.लफ़्ज़ों का सज़ा कर नगमा हालदिल सुनाया
उनके लबों की मुस्कान देख समझे हमने उन्हे मनाया
वाह वाह कह वो निकल गये हमे ग़लत फ़हमी हुई बताया

2.जाम हाथों में लिए वो पीते रहे रात भर
उनके साथ साथ हम भी नशे में है
निगाहों से पिलाने का यही असर होता है

3. ख्वाबो के पर लगा कर उड़ान भरली
ठिकाना तेरा ढूँढ ने में बड़ी देर कर दी
अब तो ना ज़मीन के रहे ना आसमान के.

4.दीवाना दिल मेरा जानता ही नही
तुझे मोहोब्बत नही हमसे ये  मानता ही नही
इसको क्या सज़ा दूं तुम ही तय कर लो.

5.चाँद रोज तुम खिड़की से क्यूँ  झाकते हो
साजन संग प्रीत छेड़ू तब क्यूँ निकलते हो
छुपने का इशारा  समझो इतने नादान तो नही हो
.  

हसरतो के कमल मेरे

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हसतो के कमल

आओ आओ सखियों आओ,कुछ राज़ बताना चाहूं मैं 
दिल की बगिया में अब के ,नये गुल खिलाना चाहूं मैं  |
 
नींद में जब सोई हुई थी,सपनो में खोई हुई थी 
कोई अजनबी दबे पाव आया,उलझी टो को सुलझाया 
उसके लबों की पंखुड़ियों को,हौले मुझ पर बरसया 
गुलाबी निशानियाँ रात की,सुबह गालों पर पा मैं  |
  
  आओ आओ सखियों आओ,कुछ राज़ बताना चाहूं मैं 
दिल की बगिया में अब के ,नये गुल खिलाना चाहूं मैं  |
  
  वही है जिसको खोज रही थी,जिसके लिए सोच रही थी 
कही दूर  था वो मुझ से,उसको अपने दिल में ही पाया 
हसतॉ के कमल पर मेरे,प्यार की दव बूंदे सजाया 
मोहोब्बत  के मंदिर में उसके,खुद को अर्पण कर  मैं  |
  
  आओ आओ सखियों आओ,कुछ राज़ बताना चाहूं मैं 
दिल की बगिया में अब के ,नये गुल खिलाना चाहूं मैं  |

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