लफ़्ज़ों का सज़ा कर नगमा

त्रिवेणी

1.लफ़्ज़ों का सज़ा कर नगमा हालदिल सुनाया
उनके लबों की मुस्कान देख समझे हमने उन्हे मनाया
वाह वाह कह वो निकल गये हमे ग़लत फ़हमी हुई बताया

2.जाम हाथों में लिए वो पीते रहे रात भर
उनके साथ साथ हम भी नशे में है
निगाहों से पिलाने का यही असर होता है

3. ख्वाबो के पर लगा कर उड़ान भरली
ठिकाना तेरा ढूँढ ने में बड़ी देर कर दी
अब तो ना ज़मीन के रहे ना आसमान के.

4.दीवाना दिल मेरा जानता ही नही
तुझे मोहोब्बत नही हमसे ये  मानता ही नही
इसको क्या सज़ा दूं तुम ही तय कर लो.

5.चाँद रोज तुम खिड़की से क्यूँ  झाकते हो
साजन संग प्रीत छेड़ू तब क्यूँ निकलते हो
छुपने का इशारा  समझो इतने नादान तो नही हो
.  

फूलों के बिस्तर उन्हे रास नही आया करते |


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

काटो से भरी राहे चुनकर जो चलते है अक्सर
फूलों के बिस्तर उन्हे रास नही आया करते |

इश्क़ की मुश्किल डगर जो थाम लेते एकबार
तूफ़ानो से डरकार वो वापस नही जाया करते |

जीवन की गहराई में जो सत्य रौशन कराए
झूठ के अंधेरो में वो कभी नही सोया करते |

खुदा की खुदाई पर जो जहन में भरोसा रखे
छोटिसी ठोकर से वो शक्स नही रोया करते |

रूह से रूह का रिश्ता जो जुड़ जाए कसम से
चाहे जनम बदल जाए वो टूट नही पाया करते |

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कल कोई और होगा

कल कोई और होगा

जिस मा ने तुम्हे जनम दिया है
उसको तुमने क्या सिला दिया है
तेरी होठो पर  जो मुस्कान सजाई
उन नयनो को क्यूँ नम किया है
गहेरी  ममता को बटोर ले आज
वरना उस आँचल का हकदार
कल कोई और होगा |

जिस जमी ने तुम्हे उड़ना सिखाया
तूने क्यूँ  अब  उसको  ही   भुलाया
जब तुम गिरते और ठोकर   खाते 
तेरी पँखो में ज़मीने बल  दिलाया
विशाल जमी की  कद्र  कर  आज
वरना उस पर कदम रखनेवाला
कल कोई और होगा |

 अब तुम्हें सारी उचाईया है हासिल
चाही जो तुमने  पहुँचे उस   मंज़िल
जिन चोटियों पर तुम गर्वसे खड़े हो
उन पहाड़ो का क्यूँ तुमने तोड़ा दिल
उनका हाथ थाम कर चलो आज
वरना उस शिखर पर चढ़नेवाला
कल कोई और होगा |

तेरी नज़्म की खनक

तेरी नज़्म की खनक

पायल सी खनकती है
मेरे दिल के आंगन में
सारी नज़्म जो तूने सवारी है |

गूंजन से गर कुछ है मधुर
हमे खुद से भी ज़्यादा अज़ीज़
ये तेरी नज़्म दुलारी है |

सप्तसुरो के रस से सजी
मन भाव से शृंगारित तेरी नज़्म
हमने इस दिल में उतारी है |

खुदा-ए-हबीब शुकसार है हम
के तेरी नज़्म की खनक
तेरे साथ साथ अब हमारी है |

एक नगमा

सुनती आई हूँ आप सब के गीत मैं आज तक

सन्जो के रखा है मैने हर एक शब्द

आप सब के गीतो की मिठास

घुली हुई है मेरे जीवन में चीनी सी

जिसकी मधुरता है मुझ में आज तक

सारे आपके गीत है नितांत सुंदर

जो करते आए है मुझे मोहित

ख्वाब सा एक बूत बन गयी हूँ मै

जैसे कोई चीज़ हूँ सुशोभित

पर आज मुझमे भी जीवन है जागा

मै भी कुछ कहना चाहूं

लेकर हाथों में मंन की वीना

मैं भी एक सुर सज़ाउ, मैं भी एक नगमा सुनाउ….

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