सबल,सजल,सरल

सबल,सजल,सरल,सढल,सुगंधा,स्वस्तिका
बेड़ियाँ को तोड़ कदमो ने ढूंढी है नयी दिशा |

ममतामयी,कोमल हृदय,कनखर भी मैं नारी
वक़्त पड़े जब रक्षा करने बनू तलवार दो धारी |

बहेती रहूंगी हरियाली बिछाती पाने अपना लक्ष
अर्जित करूँ  इतनी आज़ादी कह सकु अपना पक्ष |

हर जीवन फलता फूलता जिस पे मैं हूँ वो शाख
सुलगती चिंगारी हूँ चाहूँ बुरी रस्मे हो जल के राख |

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नारी तुझ पर संसार गर्विता

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तन चंचला
मन निर्मला
व्यवहार कुशला 
भाषा कोला
सदैव समर्पिता |

नदिया सा चलना
सागर से मिलना
खुद को भुलाकर भी
अपना अस्तित्व सभलना
रौशन अस्मिता |

सृष्टि की जननी
प्रेम रूप धारिणी
शक्ति सहारिणी
सबल कार्यकारिणी
अन्नपूर्णा अर्पिता. |

मूरत ममता
प्रचंड क्षमता
प्रमाणित विधायक
सौजन्य विनायक
अखंड सहनशीलता |

आज का युग तेरा है परिणीता
नारी तुझ पर संसार गर्विता |

हमारी सारी बहनो और साहिलियों को नारी दिवस की हार्दिक शूभेच्छा.

मुक्ति

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मुक्ति

1. भोर की लालिमा             
मन में असीम भक्ति
हाथों में पूजा थाल
तुलसी की परिक्रमा
मंत्रो का उच्चारण जाप
शन्खो का नीनाद
भजन स्तुति गा
प्रभु में विलीन हो जा
मुक्ति चिन्ताओ से |

2. नारी हूँ मैं
देवी का रूप हूँ मैं
जग की जननी हूँ मैं
ममता की मूरत हूँ मैं
समाज से पीड़ित हूँ मैं
पूजते है,जलाते भी है
अपनाते है,छलते भी है
सब की हूँ,मेरा स्वयं
अस्तित्व भूलते  है
हा आज चाहती हूँ मैं
मुक्ति दोगले विचारो से |

3. विशाल अंबर
बस यूही निहारूं
मन ही मन में
उसे छूकर 
पिंजरे में बंद हूँ
कैसे उड़ जा
आवाज़ दब गयी
आस तड़प बन गयी
स्वन्द उड़ना चाहूं
पंछी की आज़ादी पा
मुक्ति क़ैद से |

4. कालचक्र सदैव कार्यरत
ये जीवन पूर्ण ताहा जिया
अंतिम पड़ाव अब आया
अनकहा संदेसा संग लाया
मो जीने का और बढ़ाया
सच से किसने धोका खाया
आख़िर सबने इसे अपनाया
एक दिन जीवनधारा रूठेगी
सांसो की डोर कभी टूटेगी
सब कुछ खामोश
रह जाएगा सन्नाटा
अभिलाषा मोक्ष प्राप्ति की
मुक्ति जग से |

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हाइकू- नारी

हाइकू- नारी

1. ममता से भरी
    अन्नपूर्णा कहलाती है
    जन्मदात्रि

2. जिसके बिना
    सारा जग सुना सुना
    मा है वो

3. कलाई पर राखी
    भाई की दुलारी
    बहन वो

4. लक्ष्मी सी आई
   खुशियों का धन लाई
   बेटी वो

5. समर्पित सदैव
    विश्वास पर खरी
   अर्धांगिनी

6. पूजनीय सबकी
    आदरभाव जिसके लिए
    देवी वो

7. बिदाई की रस्म
    जग की रीत है
    बेटी रोए

8. अपनो के गम
    आँचल में छुपाती
    धरती जैसे

9. चाँद पर आज
    रखा कदम नारी ने
    बढता हौसला

10. चाहत उसकी
      दिवानगी की हद तक
      प्यार की मूरत.

nakhra

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तू अलबेली , नई नवेली
तू रुपसी, छेल छबली
चलती हे जब तू ईतरा के
चँदनी सी हँसी बिखराए
तेरी सादगी और मोहिनी
मेरे मन को भी लुभाए
तेरी मोर मयूर सी नीगाहे
लगता हे कुछ केहना चाहे
ना जान कर भी जानती हूँ
लगने लगी हे तू सहेली
नज़दीक आओं जितना तेरे
तू बन जाती एक पहेली
सब कुछ कितना अच्छा तुझ में
पर तेरा घमंड मुझे हे अख़रा
में चली दूजी गली
गोरी कौन सहे तेरा नखरा.