एक तेरा एक मेरा

एक तेरा एक मेरा

खिलतें है हज़ारों गुलाब
जब आते हो तुम साजन
फ़िज़ायें भी बहकने लगती है
कर खुशबू का रुख़ मेरे आँगन
महसूस होती है दूर से ही
खुशियों की चहल पहल
तेरे आने से पहले ही दस्तक देते
अरमानो की होती है हलचल
मेरे तरह सब तुझ से
मिलने को मचलते है
तेरी कदमों की आहट होने तक
बड़ी मुश्किल से खुद को संभालते है
तेरी बाहों में सिमट जाउँ
वही तो है मेरा जहां सारा
धड़कते है,दो दिल मिलते है वही
एक तेरा एक मेरा |

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सितारे हज़ारों नक़ाब बदलते है

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तुम्हे देख  हमनशी कदम खुद  खुद चलते है
बड़ी मुश्किल से जज़्बादिल हमसे संभलते है |

मिलने तुझ से सातो समंदर भी पार कर जाएँगे
महफूज़ रखेंगे तेरे साए हमे ये सोच  निकलते है |

अंधेरों का ख़ौफ़ नही रहा जिगरजान को हमारी
मोहोब्बत के गवाहचिराग रौशन होके जलते है |

महबूबआफताबजहन के राज़ –ख़यालात यहाँ
वो भी महजबीदिलकशी से मुलाकात हो मचलते है |

फलकआईने से निगाहे निसार  नही होती गुलशन आरा
आपकी आरज़ू में झिलमिल सितारे हज़ारों नक़ाब बदलते है. |

न जाने क्यों

 जाने क्यों

वो ये कैसे सोच लेता है के
उसके हर जज़्बात हमारा दिल समझता है
साथ होकर भी तरन्नुमखामोशी का साज़
हमे हरदम नागवारा लगता है
कहेने को बीच में अनगिनत बातें राह देखती
वो बस कभी आसमान  को कभी हमे तकता है
हालातआलम बदलते नज़र नही आते
छेड़ो ना वही आलाप जो रूह में बसता है
 जाने क्यूँ डरती हूँ तुमसे आशिक़ –हयात
अनकहा सा ये लम्हा रेत सा फिसलता है |

मनीप्लांट

 

मनीप्लांट

ख्वाहिशो की
पारदर्शक बोतल को
ख्वाबों के पानी से भर दिया
उम्मीद का एक
हरा पत्ता जड़ दिया

आकांक्षाओ का मनीप्लांट
देखो कैसे ल़हेरा रहा
उँचा उँचा चढ़ेगा
जिधर राह मिल जाए

सब देखेंगे उसको
बढ़ते हुए
वाह वाह होगी

जड़ों में अटकी हुई
रिश्तों की
सौंधी मिटटी को
पानी में घोल दिया
खुद से दूर……..

बादल मितवा

राह देखे मन प्रतिपल हर क्षण
ढूँढे तुझे मेरा बिखरा कन कन

नही सुने जाते जमाने के ताने
उस पर  आने के तेरे लाख बहाने

आँखें है बंजर ,कैसे नीर बहाए
सुलगती किरने आकर तनमन जलाए

तुझसे मिलने करूँ सागर का मंथन
धरा हूँ , मुझे है उड़ने का बंधन

ब्रम्‍हांड में पूरे तेरा है विस्तार
मुक्त अकेला ही करता है विहार

सुन रहे हो क्रंदन मत सता रे
कुछ लम्हो की साँसे अब तो आरे

मोहोब्बत का वास्ता तुझे धड़कन पुकारे
बादल मितवा प्यार की बूंदे बरसा रे.

मुट्ठी भर चाँदनी

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1.मुट्ठी भर चाँदनी

पहेले रोज़ खिड़की पर आता था
रात रात हमसे बतियाता था
भोर की रश्मि आने पर भी
हमे  छोड़ के जाता था
आज कल हमे देख कर
बादलों के पीछे छुप जाता है
अक्सर नज़र भी नही आता है
कोई गुनाह तो नही हुआ हमसे?
एक बार बस रात को रौशन करने
मुट्ठी भर चाँदनी ही तो
उधर माँगी थी चाँद से…….

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 2.चाँद के रूप

पौर्निमा की रात 
चाँद को
शर्मा कर खिलते हुए
मंद मुस्काते हुए
पूरी दुनिया ने देखा होगा
अमावस पर 
चाँदनी के बिना 
अकेले में रोते हुए 
उसे सिर्फ़ हमने देखा है |

समान विषमता

समान   विषमता 

बापू और अम्मा का छोटा परिवार
एक बेटी एक बिटवा दो ही बच्चे हमार
कहते है सबसे दोनो को खूब पढ़ाएँगे
उँचे ओहोदे पर, दोनो को बिठाएँगे
बेटी क्या बेटा क्या हम को है समान
हमारे दो  लाड़ले है इसका प्रमाण
सुन ओ ताया,सनरी ओ ताई
मुन्नी, बबुआ है जुड़वा बहेन भाई. |

बाज़ार से बापू जब लौटकर आए
साथ में ढेर सारे खिलौने लाए
बबुआ को अपने पास बुलाया
हाथों में उसके एक गुलेल थमाया
पीछे से मुन्नी की आवाज़ आई
बापू एक गुलेल  हमका भी चाही
ये खेल हम भी खेलत है अच्छा
बबुआ से हमार नीशाना है पक्का
नही  ये है लड़कन का खेल
तू लड़की देख तेरे लिए गुड़िया है लाई
मुन्नी, बबुआ है जुड़वा बहन भाई. |

घर में अचानक आए मेहमान
चल रे मुन्नी हाथ बटा बहुत पड़ा काम
बनानी रसोई,दिया क्या सुनाई
अम्मा मुन्नी पर ज़ोर से चीलाई
दौड़ दौड़ के मुन्नी जल्दी से आई
बबुआ को संग बुला अम्मा काम जल्दी निबट जाई
परीक्षा चल रही उसको करने दे अभ्यास
अव्वल नंबर लाने उसको करना है सराव
कल गणित का पर्चा मेरा ,फूटी मुन्नी की रुलाई
मेरी भी तो अम्मा रही अधूरी पढ़ाई
मुन्नी,बबुआ जुड़वा बहेन भाई. |

सोचती मुन्नी कैसे है ये आधुनिक विचार
अपनो से पाया उसने दोगला व्यवहार
समानता का बस उपर उपर का कहलावा
आधुनिकी करण का कैसा ये दिखावा ?
हम पर कित्ते बंधन,बबुआ को क्यूँ है छूट
नन्हा सा मन अपनो से गया रूठ
लाडली हूँ घर की,फिर भी बोलत हो पराई
ये समान विषमता घर में हर बेटी ने पाई
मुन्नी ,बबुआ जुड़वा बहेन भाई. |

ऐसी हर सहर कीजिए

ऐसी हर सहर कीजिए 

नींद खुले देखूं तुम्हे ऐसी हर सहर कीजिए 
दिल में छुपाए कुछ राज़ हमे खबर कीजिए | 

पैगाममोहोब्बत भेजा है खत में नाज़निन
बुल हो  गर तोहफाइश्क़ हमसे नज़र कीजिए | 

खुशियाँ बाटने यहा चले आएँगे अनजान भी
किसी के गम में शरीक अपना भी जिगर कीजिए | 

आसान राहों से जो हासिल वो भी कोई मंज़िल हुई
खुद को बुलंद करने तय  मुश्किल सफ़र कीजिए | 

दुश्मनजहाँ के तोड़ रहे है मंदिर मज़्ज़िद
अपने गुनाहो की माफिएअर्ज़  अब किधर कीजिए | 

लहू के रिश्तों से भी मिले अब फरेब – खंजर
परायों से अपनापन नसीब वही बसर  कीजिए | 

ज़मीन समेट्ले बूँदो से वो बादल है प्यासा
आसमान झुके पाने जिसे  प्यार इस कदर कीजिए | 

गुलाब से सजाए लम्हे भी मुरझाएंगे कभी
यादों में उनकी “महकरहे ऐसा असर कीजिए |

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

तेरी याद में

तेरी याद में
कितनी करवटें बदली,कितनी सिलवटें बिखरी
नींद से कोसो दूर वो रात भी जागी साथ हमारे
गमजुदाई में तेरी डूबे थे इस कदर क्या कहें
उलफतदिल उलझा रहा और चुन गयी दीवारे
तुझ से मिलना बहुत हो गया मुश्किल हमदम
मुलाकात की ख्वाहिश पूरी करने टूटे लाखों सितारे
अब तलक ताज़ा  है वो आँसू जो निकाला तेरी याद में
तुझ बिन हर सुना लम्हा कट जाता है उसके सहारे |

पहला प्यार

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पहला प्यार  

 

जब भी देखूं तुम्हारी आँखों में
याद आते हैं वो गुजरे गुलाबी लम्हें
पहला प्यार जो हमारी ज़िंदगी में आया
उन हसीन घड़ियों में ,हमने तुम्हें पाया

 बरसातों के खुशनुमा मौसम
कुछ भीगे तुम, कुछ भीगे से हम
राह से चलते-चलते अनजाने से टकराए
ठंड से कपकपाते बदन, थोड़े से सहेराए
चहेरे से टपकती बूंदें, गालों पर लटों की घटायें
नयना मिले नयनों से, हम दोनों मुस्कुराए
सिमटकर अपनी चुनरी, शरमाये निकल गये थे।

घर पहुँचे लेकर तेरे उजले से साए
पलकों में बंद होकर साथ तुम भी चले आए
मुलाक़ातों के फिर शुरू रोज़ सिलसिले
दिल-ओ-जान हमारे, सदा ही रहे मिले
रेशम डोर से बँधकर, मिलकर ख्वाब सजाए
प्यार, समर्पण के भावना से गीत रचाए
तुम्हारे होने से जीवन के नज़रिए बदल गये थे।

इतना वक़्त जो तुम संग बिता लिया
हर लम्हा जिया वो था नया-नया
गुलशन-ए-बहार में खुशियों के फूल खिलाए
संभाला तुम्हीं ने हमें ,कभी कदम डगमगाए
सिखाया तूफ़ानो का सामना करना
संयम से अपने अस्तित्व को सँवारना
प्यार की गहराई के असली मायने समझ गये थे |

गुलाबी लम्हों को रखा संजोए
मन में उनको पल पल दोहराए
क्या पहला प्यार फिर हो सकता है?
होता है, आज मुझे हुआ है
दोबारा तुमसे…..

http://merekavimitra.blogspot.com/2008/03/blog-post_5284.html

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