कुछ दिल से

कुछ दिल से 

१. वैसे तो आपकी हर अदा से वाकिफ़ है दिलदारा 
   डरते है जब इश्क़ में इम्तेहान  देने की बात हो |

२. जब तक न तुमसे बातें हो दिल-ए-ग़ुरबत सुकून नही पाता 
   बार- २ दोहराओ वादा-ए-इश्क़,तब तक उसे यकीन नही आता |

३. बैचेनियों के तूफान क्यों उठते है दिल में हर वक़्त 
    तेरी एक नज़र बस ,इत्मीनान से थम जाया करते है |

४. रात की नींद भी सुहानी बने जो तू ख्वाब में आ जाए
     कोई सवाल मुश्किल नही ज़िंदगी का जो तू जवाब दे जाए |

५. तेरी मुस्कान को देख कर,हम भी रोज हंस लेते है
    तुझ से बातें करने संगदिल मगर बहुत तरस जाते है | 

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ख्वाब

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ख्वाब

अँखियों की  पलकों में समाए ये रहते
मन में छिपी बातों को हमसे ये कहते
कुछ स्याह कुछ इंद्रधनु से रंगीन ये ख्वाब |

नींद में कितने बन जाते ये अपने से
खुल जाए जो चक्षु  हो गये पराए वे
कुछ पाकर कुछ हाथों से ओझल ये ख्वाब |

ख्वाबों में जीना अक्सर ज़रूरी होता है
समझ कर उन्हे पाना मुश्किल होता है
दिखाते है अरमानो को मंज़िल ये ख्वाब |

ख्वाबो पर अपना हर पल निर्भर ना हो
अक्स छोड़ परछाई दिखाए वो दर्पण ना हो
कुछ खिलते कुछ खुद से बोझिल ये ख्वाब |

उड़ जा पंछी भोर भई

अब तक तुम गहरी नींद सोए हुए हो
किन सच्चे झूठे सपनो में खोए हुए हो

वो कौनसी यादे है जो पीछा नही छोड़ती
वो कौनसी राहे है जो आगे नही बढ़ती

उन पुरानी यादों को तुम भुला दो
उन बेमानी बातों को तुम सुला दो

ख्वाबो और हवाओ में नही बनते महल
जिद्द पर तुम उतर आओ अगर
कीचड़ में भी खिल जाते है कवल

बस अपने धेय पर अटल रहना
दृढ़ निश्चय से जीवन लक्ष की और बढ़ना

जगाओ मन में आज,एक और नयी आशा
चूनलो अपने लिए,एक और नयी दिशा

कल की निशा के साथ,बीती बात गयी
उड़ जा रे पंछी , एक नयी भोर भई.