अजीब सी राहें

अजीब सी राहें

ज़िंदगी में कितनी
अजीब सी राहें शामिल है
तुम भी गुज़रे उनपर
हम भी चले है
दुआयें माँगी उसकी
दरबार में,बुल हुई
नेमतमुलाकात में
तेरे निशान मिले है |

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तेरे कदमो के निशान

रात रात भर करटे बदलते नज़र आये
तेरी यादों के साये बेवक़्त हमे सलते है |

दुनिया की सच्चाई से रिश्ता तोड़ लाए
तुझसे मिलनके ख्वाब में हम पलते है |

तुझ तक पहुँचना अब मुश्किल ना रहा
तेरे कदमो के निशान पर हम चलते है |

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