तेरे वजूद का एहसास

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अपने आप में खोई,अकेली ही खड़ी थी | न जाने किस सोच में डूबी थी | 
लंबे घने गेसुओं को उसकी ,बहती हवा भी छूने को मचल पड़ी | कभी यूही 
ल़हेरा के छोड़ देती,कभी एक लट का टुकड़ा उसकी मुख मंडल पर रख देती | 
मगर वह  ईन अटखेलियों  से जुदा बनी रही | जान बुझ कर या अनजाने में
शायद उसे भी नही पता था | 

     सूरज की गुनगुनी धूप में उसका चहेरा जगमगा तो रहा था,मगर उस पर कोई 
भाव नही परावर्तित हो रहे थे | लगा एक कदम आगे बढ़कर क्यूँ न गुफ्तगू कर ले |
उसकी तल्लिनता भंग करने का साहस नही जुटा पाई | क्या वह खूबसूरत तराशा 
हुआ बुत मात्र है,जो जीवित हो कर भी सवेदना हीन होती है | नही ऐसी तो कोई बात 
नही लग रही |

  चाहे उसपर किसी और बात का असर न हो रहा हो,बदलते रुत का,मौसम के
 रुख़ का असर हो रहा था | जैसे उसके दिलदार का पैगाम हो उन में,और वह हर
बात सुनकर ,मुख की बदलती रंग छटा से  उसका जवाब दे रही हो |

   कही से अचानक ही रुई से लबालब बादल इकट्ठा होने लगे थे | उसके मुख की
रेखायें तनी सी खीची सी लगने लगी | हल्का गुलाबी गोरा रंग उनके काले स्याह
रंग में घुल गया | कुछ ज़ोर ज़ोर की आवाज़े और उसका बढ़ता तनाव,जैसे
सारे जहाँ की चीता में डूब गयी हो | ज़्यादा देर नही चला ये सब,किसी ने रुई की
फाहो को निचोड़ दिया होगा | उस में भरा पानी छम छम करता धरा की गोद में बहने
लगा | पैरों के नीचे से गुज़रते ठंडे स्पर्श ने उस पर सम्मोहन सा जगाया ,या सवेदना
का चुबक लगाया न जानू | वह मदहोश सी मुस्कुरा उठी |

    जब बादलों के पर्दों से किरनो का रथ निकला ,सारी सृष्टि पाचू के रंग सज गयी |
सुरभी के सुवास से मन पटल के द्वार खोल दिए | गगन का इंद्रधनु पूरे क्षितिज पर 
बिखर  पड़ा | फूलों पर जमी बूँदों में खुद को निहारती वह खिलखिला कर हस दी |
उसके हर बदलते रूप और भाव के साथ मैं भी जुड़ गयी थी अब तक | साथ कुछ पल
का ही ,एक रिश्ते में बदल गया हो जैसे | वो जैसी भी है मैं ने अपना लिया उसे | कभी
मासूम बच्चे सी ज़िद करती है,कभी अल्लड़ सी दौड़ती है,कभी समझदारी की बातें भी 
करती है | वो है तो मेरा ही हिस्सा | तुमसे मुझे प्यार है नाआशना | ज़िंदगी मुझे  
तेरे वजूद का एहसास है अभी |

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पानी की बूँदे

पानी की बूँदे

आती है जो गालों पे
अक्सर जब मन भर आए
हे रूप अनेक इसके
दिल को ये सेहेलाए
ग़म अगर हो ज़्यादा
बन जाती है ये रुलाई
ख़ुशी अगर हो इतनी
मोती बन ये हसाए
हमेशा ये साथ देते
हमे हर पल ये बेहेलाती
अनमोल ये पानी की बूँदे
आँसू हे कहेलाती