शृंगार

शृंगार

1.बिंदिया,झुमका,पायल,बाजूबंद मैं सब कुछ पहनकर आउ
   एक काला तीट मुझे लगाना, सब की नज़र से मैं बच पाउ |

2.पिया लुभावन, हर दिन में दुल्हन , चाहे सोला शृंगार करे
   शृंगार उसका अधूरा लागे,जब तक ना सिंदूर से माँग भरे |

3.गोल गोल जो सदा घूमत रहे, मुझे वो ही गरारा चाहिए
   पिया मिलन से मैं शर्माउ,चहेरा छुपाने ओढनी भी लाइए |

4.किन किन करते कंगना मेरे,खनक खनक सब कुछ बोले है
   लाज के मारे लब सिले है , तब कंगना दिल के राज़ खोले है |

5.ठुमक ठुमक जब गोरिया चले है ,उसकी तारीफे कीजिए गा
    रूठे जो सजना से गोरी ,मनाए खातिर, नौलखा दीजिए गा |

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तेरी पायल की रुनझुन

तेरी पायल की रुनझुन

दिल में हलचल कराती है
दिल में मीठे सुर सज़ाती है
दिल से गीत सुनाती है
दिल को महफ़िल बनाती है
तेरी पायल की ये रुनझुन |

दिल में तेरी याद लाती है
दिल से तुझे बुलाती है
दिल के मिलन को तरसाती है
दिल से तुझे अपना मीत बनाती है
तेरी पायल की ये रुनझुन |

दिल में दीप जलाती है
दिल की राहे रौशन कराती है
दिल को अपनी लौ से पिघलाती है
दिल में प्रीत जगमगाती है
तेरी पायल की ये रुनझुन |

पास  हो  तुम  सदा  मेरे , ये एहसास  कराती है
तेरी पायल की ये रुनझुन,कई हसरते जगाती है |

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