इन फूलों की बारिश में

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इन फूलों की बारिश में
भीग लेते है हम भी
मोहोब्बत के इत्र की महक
जरा बदन पर चढा लूँ
अगले मौसम तक फिर
ये ताजगी रहेगी मन में .
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रिझाने प्रियतम फूल को,गुनगुनाया,बहलाया
खिली हर पाखी जब नाजुक प्रेम स्पर्श सहलाया
जज्बातों में बह के अपना मधुरस दे बैठा
मेरी मन तितली तो बस खुशबु की दीवानी है |

ye chitra humne kisi ke blog se liya hai,blog ka naam yaad nahi,unka shukran.

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फूलों से रंग और महकती मधु बूंदे

फूलों से रंग और महकती मधु बूंदे
हर सुबह नज़रों से बिन भूले पिये जा |
फिर भंवरे के जैसी मीठी गुंजन करते
जीवन बगिया में  मद मस्त जिये जा |
कुदर की सुनहरी धूप और गरमाहट
हमेशा ,हर कदम पे महसूस किये जा |
जो प्यार इस धरा से तुम्हे नसीब हुआ
उसके कुछ अंश हर दिल को दिये जा |
ये सारी प्रक्रुति जब प्यार से चहकेगी
जाते हुए उसकी दुआ तू संग लिये जा |

kamal ke phool

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कनक सी रवि किरनो से
पवन मखमली एहसास तले
मनमोहक झरना निर्मल सा
हरे पन्नो के बीच में
दो  कमल के फूल खिले
शामाल श्वेत रंग परिधान कर
बहते पानी के संग चले
एक बार भी नही हटी नज़र
नही भूले वो अपनी डगर
चलते रहे एक दूसरे की और
पाने को अपनी मंज़िल
जहाँ दो खूबसूरत दिल मिले
देखो ना,उन हरे पन्नो में
दो कमल के फूल खिले.