ये इश्क भी क्या क्या खता करवाता है

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ये इश्क भी क्या क्या खता करवाता है
महबूब -ओ-दिल पे शक की सुइयां दिखाए

माना उनसा इमानदार न कोई कायनात में
वक़्त के साथ चलना उन्हें आता नहीं

मुलाकात की जगह हम मौजूद पहले से
राह चलते लोगों की सवालिया नज़र का क्या जवाब दे

ये कैसा इम्तेहान लेते वो हमारा
पर्चा भी हम दे और जाच भी हम करे

मुस्कुराके आयेंगे जनाब बहानों का गुलदस्ता लिए हुए
ये भी याद नहीं पिछली बार यही बहाना था

वादा-ए-रस्म उन्हें निभाना आएगा भी या नहीं
या हम रूठना और वो मनाना इस खेल के नियम बनेगे

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sone ka pinjar

सारे ऐहीक सुख है उसके पास
किसी चीज़ की नही है कमी
सोचती क्या किस्मत उसने पाई
सोने की दुनिया,उसके हिस्से आई
बास कुछ केहने की देर
सब तुरंत मिल जाता
फिर उसके चेहरे पर
वो नूर क्यों नही आता ?
जिस नसीब पर उसे था नाज़
उस पर ही रोना आता क्यों आज
वो एक आज़ाद पंछी है,रहती वो आसमान पर
ये सोने का पिंजर ,कैसे हो गया उसका घर?
खोल दो ये क़ैद का बंधन
कर दो उसे आज़ाद
फैलाने दो उसे वो पंख
हवा को चिरती उसकी उमंगे
उड़ने दो उसे भी उनके संग
देखने दो उसे,उँचाई से ये मंज़र
उपर किरनो की बाहे,नीचे गहरा समंदर
खोजना है उसे,एक नया आकाश
तलाश करना है अपना अस्तित्व
बनाना है ख़ुद का .व्यक्तित्व

पाऊलवाटा

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आठवनिंच्या  झोक्यावर  आज घेतला मी विसावा 
अजूनही शोधाते आहे प्रेमाचा तों हरवलेला ओलावा
आज मज पाशी आहेत अनेक नातिगोती
अजूनही जपून ठेवल्यात मी जुन्या चालीरीती 

अजूनही आहे माझा  गुलमोहर फुलेला
त्याचा सुगंध मनात खोलवर मुरलेला
मन् तरंगते त्या  निळ्या नदीच्या काठी 
जिथे कोणीही जीव लावे कोणा साठी 

आठवतों प्रेमाचा तों हिरवाकंच गालीचा विणलेला 
मुलायम रेशमी धाग्यानी प्रत्येक नात्यात गुंतलेला
एके दिवशी  मी परत तिथेच येइन 
प्रेमाची ती पालवी परत घेउन जाइन  

जीवनाच्या वाटेवर आज मी खुप पुढे आले 
आपल्या माणसात  असुनही परकी झाले
अजुन खुप चालायचे आहे निरोप घेते मी आता
पहायचे आहे कुठवर नेतात नशिबाच्या पाऊलवाटा 

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अपना सा

 

 एक ही बार छोटी सी बात
एक ही वक़्त हुई मुलाक़ात
पल भर के लिए ही मिली थी नज़र
दिल धड़का था ज़ोरों से मगर
लगा जैसे तू ही हे वो
जिसे ढूँढ रही मे अरसो से
तलाश थी इस जीवन में
जिसकी मुझे बरसों से
बहार आई हे संग तेरे
या ये कोई हे सपना सा
तू बेगबा और आनजाना
इतना क्यों लगे अपना सा

nakhra

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तू अलबेली , नई नवेली
तू रुपसी, छेल छबली
चलती हे जब तू ईतरा के
चँदनी सी हँसी बिखराए
तेरी सादगी और मोहिनी
मेरे मन को भी लुभाए
तेरी मोर मयूर सी नीगाहे
लगता हे कुछ केहना चाहे
ना जान कर भी जानती हूँ
लगने लगी हे तू सहेली
नज़दीक आओं जितना तेरे
तू बन जाती एक पहेली
सब कुछ कितना अच्छा तुझ में
पर तेरा घमंड मुझे हे अख़रा
में चली दूजी गली
गोरी कौन सहे तेरा नखरा.

apni apni manzile

ये दुनिया एक विशाल सागर
हम बसे हे इसकी कन कन में
सुख दुख तो आते जाते रेहते
जीवन बदले हर एक क्षण में

संग हमारे कितने रिश्ते नाते
हर वक़्त हमे ख़ुशियाँ देते
जैसे ही हम उदास होते
अपने ये ,हमारे आँसू भी पी जाते

पर फिर भी कभी अकेले
बुन कर ख्वाब सज़ीले
तलाशते रेहते हम यहाँ
नई अपनी अपनी मंज़िले

sone ka pinjar

सारे ऐहीक सुख है उसके पास
किसी चीज़ की नही है कमी
सोचती क्या किस्मत उसने पाई
सोने की दुनिया,उसके हिस्से आई
बास कुछ केहने की देर
सब तुरंत मिल जाता
फिर उसके चेहरे पर
वो नूर क्यों नही आता ?
जिस नसीब पर उसे था नाज़
उस पर ही रोना आता क्यों आज
वो एक आज़ाद पंछी है,रहती वो आसमान पर
ये सोने का पिंजर ,कैसे हो गया उसका घर?
खोल दो ये क़ैद का बंधन
कर दो उसे आज़ाद
फैलाने दो उसे वो पंख
हवा को चिरती उसकी उमंगे
उड़ने दो उसे भी उनके संग
देखने दो उसे,उँचाई से ये मंज़र
उपर किरनो की बाहे,नीचे गहरा समंदर
खोजना है उसे,एक नया आकाश
तलाश करना है अपना अस्तित्व
बनाना है ख़ुद का .व्यक्तित्व

vada

चाहे अगर तो रूठ जा , तू सौ बार सही
मनाने तेरे अपने आएँगे , कोई शिकवा नही

चाहे अगर तो भूल जा , अपनी दी हुई कसम कोई
अपने फिर भी साथ रहेंगे , कोई गम नही

चाहे अगर तो रिश्तों से मोड़ ले तेरा दामन
तेरी सांसो में रहेंगे,बनके प्यार के गीत वही

चाहे अगर तो,अपनो से तू कभी ना बोलना
पर किसी से किया सच्चा वादा कभी नही तोड़ना

विश्वास के मोती जब , एक बार बिखर जाएँगे
तू लाख कोशिश कर ले,फिर कभी  नही जुड़ पाएँगे