वो तुम ही तो हो

वो तुम ही तो हो

रहता है जो इन झील सी निगाओं में
बन कर ख्वाब मेरे,वो तुम ही तो हो |

नाम लेती हूँ जिसका मेरी सांसो में
ज़िंदा हूँ मैं जिस कारण,वो तुम ही तो हो |

सुनना चाहूँ मैं हर पल अपने कनखियो से
जो मधुर मीठि वाणी,वो तुम ही तो हो |

जो दौड़ता है मेरी नस नस में लाल रंग
पहुचता है दिल तक मेरे,वो तुम ही तो हो |

किसी भी मोड़ पर,ज़िंदगी की राहों में
जो शक्स मिलता है मुझे,वो तुम ही तो हो |

जो बहता है बनके गीत मेरी अधरो पर
वो नज़्म खालिस,वो तुम ही तो हो |

जो चलता है हर वक़्त साथ साथ मेरे
वो अपनासा साया , वो तुम ही तो हो |

पहना है जिस्म पर मेरी जो शृंगार
वो खूबसूरत गहना,वो तुम ही तो हो |

जिस अज़ीज़ के बिना मैं हूँ अधूरी अधूरी
मुझे सपूर्ण करनेवाले,वो तुम ही तो हो |

जिसे माँगा है हमने खुदा से इबादत में
वो दुआ हमारी,वो तुम ही तो हो |

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apni apni manzile

ये दुनिया एक विशाल सागर
हम बसे हे इसकी कन कन में
सुख दुख तो आते जाते रेहते
जीवन बदले हर एक क्षण में

संग हमारे कितने रिश्ते नाते
हर वक़्त हमे ख़ुशियाँ देते
जैसे ही हम उदास होते
अपने ये ,हमारे आँसू भी पी जाते

पर फिर भी कभी अकेले
बुन कर ख्वाब सज़ीले
तलाशते रेहते हम यहाँ
नई अपनी अपनी मंज़िले