पहली बूँद

पहली बूँद

आज इस वक़्त गर्मी से अलसाया मौसम भीग रहा है | बरसात की बूँदों ने
अपना गीत छेड़ दिया | छन छन सी प्यासी धरती पर नाच रही है वो बूँदें |
और भीग भीग कर मद मस्त हुए मन के मयूर पंख पसारे स्वागत कर
रहे है बदलाव का |

   ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो ,खुशियों की हवायें अपना रुख़ हमारी और
बदल रही है | तन पर गिरती हर बूँद , जाने मन को भी किन किन 
हसीन यादों में भीगा रही है | वो मीठे एहसास फिर उभर कर आते है |

   माटी की सौंधी सी खुशबू तेरा ही पैगाम देती है | उसी की तरह तुम भी
हमारी साँसों में बसे हो | वही खिड़की,वही कोफ़ी का कप,वही मस्ताना
र्रिमझिम सा गीत,वही तेरी बातों और हँसी की याद |बहुत दूर हो हमसे 
तुम ,क्या सुन रहे हो दिल के साज़ ? पगली कहते हो हमे तुम,वही सवाल 
बार बार करती हूँ, जानती हूँ समझ जाते हो तुम अनकहे ही इस दिल के राज |