अभिलाषा

गर्भ कोष की गहराई में
एक बीज आकार ले रहा
हौले हौले जोड़ रहा है
सवेदना की पंखुड़ियों को
खूबसूरत कली पर अपनी
किसी की नज़र न पड़े
इसलिए अंधेरे के जाल बुनता है
पता नही कैसे खबर मिलती है
उनको,शायद महक पहुँचती होगी
झुंड में आजाते है मिलकर
नोचने ,खरोचने को
असंख्य वेदना,दबी चीख
और लहू के  नदी बहती है
खून की होली खेलने का आनंद
हर चेहरे पर साफ लिखा
गर्भ खामोश,एक सिसकी भीं
नही भर सकता,
एक ही अभिलाषा थी  मन में
उसका फूल खिलता,
पूरे जहाँ को चमन बनाता
वो लहू का लाल रंग ही
अनगिनत खुशिया लाता
मगर उसने सोच लिया है अब
और नही ज़ुल्म सहेना
बंद कर लिए है अपने दरवाज़े
तब तक नही खुलेंगे
जब तक अपनी बेजान पंखुड़ियों को
जीवन दान देकर सशक्त चमन का
निर्माण न कर ले….

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आयो होली को त्योहार

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आयो होली को त्योहार 
  बिखरी फागुन की बहार 
मनवा झूमे हमार 
चढ़ता मस्ती का खुमार 
ढोल मंजीरे ढ़म ढ़म 
पैंजनियों की छम छम 
पाव खुदई लेत थिरकन 
नब्ज़ नब्ज़ बढ़े धड़कन 
होली होय हर आँगना मा शोर 
उमड़ा जोश से चारों और 
सात रंगो की बौछार 
अंबर सज गयो अबीर गुलाल 
मदहोस नाचत फाग
म्हारा जिया लगायो आग 
अब के  हमका भी खेलन की होरी 
सैय्या जी से करें की जोराज़ोरी
छिपयके उका रंग मा है रंगाना 
लागत के ये होये की अब ना 
के हम आ गये पिहड़ 
ढोलना रह गयो ससुराल 

 ye niche wali panktiyan mirabai ki rachana hai.

श्याम पिया मोरी रंग दे चुनरिया
ऐसी रंग दे के रंग नाही छूटे
धोबिया धोए ये चाहे सारी उमरिया
लाल  रंगाउँ मैं,हरी  रंगाउँ मैं
अपने ही रंग में रंग दे चुनरिया
बिना रंगाये मैं तो घर नही जाउंगी
बीत ही जाए चाहे ये सारी उमरिया |
                              –मीराबाई 

होली मुबारक

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होली 

     //1//
मन में घुली मीठी गुझिया सी बोली हो 
प्यार के रंग लगाओ दुश्मन या सहेली हो |
गुबार वो बरसों से पलते रहे है दिल में
नफ़रत पिघलाती मिलन सार ये होली हो | 
गुस्ताखियों के अरमानो की लगती है कतारें 
हर धड़कन की तमन्ना उसका कोई हमजोली हो | 
जज़्बातों की ल़हेरें ऐसी  उठाता है समंदर
दादी शरमाये इस कदर जैसे दुल्हन नवेली हो | 
मुबारक बात दिल से अब कह भी दो “महक” 
आप सब के लिए होली यादगार अलबेली हो |

    //2//

छाई खुशियों की बौछार
के आई है होरी
मीठी गुझिया,मीठा मोरा सैय्या
दोनो पे टिकी होये
इस दिन नज़र हमारी

बड़ी स्वादिष्ट सी गुझिया
हाय,खाने को जियरा ललचाय
लागे एक ही बारी में
स्वाहा करूँ सारी
छुपाय के सबसे खाना पड़त है
देखे कोई ई न कह दे
बहुरिया घर की,सब से चटोरी.

देख सलोना भोला सैय्या
गोरियों का दिल मचल जाय
नटखट सखियाँ धोखे से
सजनवा को भंग पीलाय
जानत मस्ती,पर मन घबराए
कोई मोरे सैययांजी की
कर ले ना चोरी.

भूल,ख़ता माफ़,मन की स्लेट कोरी
रंगों से सजी हो सब जन की होरी.

-महक

http://merekavimitra.blogspot.com/2008/03/33-2-1.html

कुछ यूँ ही

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1..  जब संग तुम्हारे होती हूँ सनम 
      ज़िंदगी की मंज़िले और भी करीब नज़र आती है  |

2,, ये तन्हा रहने की ज़िद्द कबसे करने लगी हो 
      नदिया को एक दिन सागर में समा जाना है.  |

3,, एक तस्वीर बनाई है तुम्हारी दिल में 
     अपने तकदीर की लकीरों से 
     इंतज़ार कर रही हूँ चित्रकार 
    तुम आओ,और प्यार के रंग भर दो  | 

4,, हम तो अजनबी थे यहाँ पर एक दिन 
      अब सब कुछ अपना सा लगने लगा है 
      आपके रंग में ऐसे रंग लिया खुद को 
      हमारे ख्वाहिशों का घर भी सजने लगा है.  |

5,,  अब दिल में बस ये तमन्ना  है बाकी 
      जाम छोड़ के मुझे साथ लेजा तू साकी  |

6,,  यादे धुंधली हो कर भुलाई जाती है वक़्त के साथ 
      किसी  की और हमारे रुख़ बदल जाते है वक़्त के साथ 
      जो कभी दिलजान से ज़्यादा अज़ीज़ हुआ करते थे 
      वो भी पराए हो जाते है  हमसे वक़्त के साथ.  |

फूलों से रंग और महकती मधु बूंदे

फूलों से रंग और महकती मधु बूंदे
हर सुबह नज़रों से बिन भूले पिये जा |
फिर भंवरे के जैसी मीठी गुंजन करते
जीवन बगिया में  मद मस्त जिये जा |
कुदर की सुनहरी धूप और गरमाहट
हमेशा ,हर कदम पे महसूस किये जा |
जो प्यार इस धरा से तुम्हे नसीब हुआ
उसके कुछ अंश हर दिल को दिये जा |
ये सारी प्रक्रुति जब प्यार से चहकेगी
जाते हुए उसकी दुआ तू संग लिये जा |

हम तुम

हम तुम
अलग अलग
दो तन
एक मन
बाहों में
ये कंपन
हमारी तुम्हारी
बढ़ती धड़कन

हम फूल 
तुम खुशबू 
इन फ़िज़ायों संग
हो जाए रूबरू

हम घटा
तुम सावन
आओ बरस जाए
प्यासी धरती
तृष्णा मिटाए

हम दीप
तुम बाति
मिलकर जल जाए
प्यार की ज्योति
रोशन कराए

हम नींद
तुम ख्वाब 
कर ले सारे
अरमान पूरे
कोई सपने
ना रहे अधूरे

हम सुर
तुम गीत
छेड़े साज़
सजाए प्रीत
एक धुन
बन जाए मीत

हम वफ़ा
तुम कसम
आज निभाए
ये रसम
होंगे ना जुदा
सजनी साजन

हम तुम
एक रंग
सदा रहे
संग संग.

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yadoon ke rang

कुछ पल जिंदगी के होते है कितने अच्छे
मुलायम और मासूम से
कभी हम अंजाने ही मूड जाते उन राहों पर
निहारने उन लम्हों को
जो सजे थे प्यार से
नही जानती,क्या यादों का रंग है सुनहरा
पर यादों से मेरा रिश्ता है मीठा गहरा
आसमान से लेकर नीलाई
और इंद्रधनु से सारे रंग
किरानो से चुरा कर लाली
और श्वेत फूलों के संग
चाहती हूँ उन लम्हों का एक चित्र बनाना
चाहती हूँ उन लम्हों में फिर से जीना
चाहती हूँ यादों के रंग में आज फिर रंग जाना..