अंधेरे से उजाले तक

है ना बहुत गहरा अंधेरा है,
तेरे आसपास का कुछ भी
दिखाई नही दे रहा
झुंझलाहट,क़ैद का आभास
अंधेरों में गुम होती आवाज़े
कोई रोशनदान भी नही
अगर तुम महसूस करोगे
सब की हालत तेरे जैसी है
कोई मद्दत के लिए नही आएगा
इधर उधर टुकूर -२  क्या देख रहे हो
मैं हूँ,तुम्हारे अंदर का चिराग
थोडिसी हिम्मत कर,जलाओ मुझे
धुआँ उठेगा,साँस चढ जाएगी
पर साथ थोड़ी रौशनी भी आएगी
वही तुम्हे राह दिखाएगी
अंधेरों से उजाले तक का
तुम्हारे अस्तित्व का सफ़र
तय करने के लिए….

 

 

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धूप का रेशमी टुकड़ा

धूप का रेशमी टुकड़ा

दिन की पहली प्रहर में
कोई दस्तक सुनाई दी
झरोखे से देखा  छुपकर
वो खड़ा था मेरी दहलीज़ पर
सोने सी चमकती काया
मुखड़े पर अरुनिम तेज
धूप का रेशमी टुकड़ा
सरक सरक के आगे बढ़ रहा था

जैसे अपने लिये कोई जगह तलाश रहा हो
कर रहा था इंतज़ार शायद
किवाडो के खुलने का
अंधेरो को उजागर करने का
निशा को आशा में बदलने का
अपने मृग नयनो से
 कुछ खोजता नज़र आया

छिपा ना पाई खुद को ज़्यादा देर
मुझे देख वो मंद मंद मुस्काया
सुनहरे धुलिका के कन उसके
और ही जगमगा उठे
आने दोगी भीतर मुझे
एक टक देख बतिआया
किस राह से आउ
झरोखे से छन छन कर
या खोल रही हो किवाडो के ताले
एक साथ की कह दूँगा सारे ज़ज्बात
जो नाज़ो से दिल में पले

ले रही थी उसकी बातों का अंदाज़
कितनी सच है,कुछ तो हो आगाज़
हां मोह लिया मेरे मंन को 
जन्मो  के रिश्ते का
कर गया प्रण वो
जागृत हुई नयी अभिलाषा
बन जाउ धूप की छाया
खोल दिये सारे बंधन
खुद को उसकी आगोश में पाया

उसने अपना वादा बखूबी निभाया
ले जाता है मुझे संग अपने
जिस राह भी चलता है
मैं शामल हूँ,वो पीताम्बर
ऐसा ही संसार बसाया
और तब से अब तक
दिल में टिमटिमाती  रहती है सदा
उसकी मोहोब्बत की गुनगुनी रौशनी |

फूलों के बिस्तर उन्हे रास नही आया करते |


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

काटो से भरी राहे चुनकर जो चलते है अक्सर
फूलों के बिस्तर उन्हे रास नही आया करते |

इश्क़ की मुश्किल डगर जो थाम लेते एकबार
तूफ़ानो से डरकार वो वापस नही जाया करते |

जीवन की गहराई में जो सत्य रौशन कराए
झूठ के अंधेरो में वो कभी नही सोया करते |

खुदा की खुदाई पर जो जहन में भरोसा रखे
छोटिसी ठोकर से वो शक्स नही रोया करते |

रूह से रूह का रिश्ता जो जुड़ जाए कसम से
चाहे जनम बदल जाए वो टूट नही पाया करते |

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नयी सुबह आई है

नयी सुबह

जिसका कल से था इंतज़ार
वह नयी सुबह अब आई है
नये साल के साथ है आई
नया आगाज़ संग लाई है |

नयी सुबह से मैं भी
नयी साँसे आज ले रही हूँ
मनका पुराना मलिन चोला
फिर नयासा में धो रही हूँ |

नयी सुबह में फिर मैं
नया जनम आज ले रही हूँ
मन में अंकुरित होने वाले
नये सच्चे बीज बो रही हूँ |

नयी सुबह से आज मैं
पहली किरण ले रही हूँ
मन में प्यार का उजाला करे जो
नये दीप रौशन कर रही हूँ |

नयी सुबह को मैं भी
नया वचन आज दे रही हूँ
हर दिन कुछ अच्छा काम करूँ
नया वादा मैं एसा कर रही हूँ |

नयी सुबह के साथ मैं
नये सपने आज बुन रही हूँ
पुराने उलझे धागे खोलकर
नये सफ़र पर मैं निकल रही हूँ |

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