कौन हो नूरे-जिगर

कौन हो नूरेजिगर कोई मोह्पाश हो
हकते दिल में खिला प्यार पलाश हो |

खीची चली आती हूँ उसी मकाम पर
मुश्किल से मिलती वो बूँद आस हो |

शाहेसमंदर कब का रीता हो चुका
बुझती ही नही कभी अजीब प्यास हो |

तुमसे दूर जाउँ ये ख़याल सितम ढाए
जिस में जकड़ना चाहूं एसे बन्द्पाश हो |

जमाने से छुपाना और जताना भी है
नवाजिश करूँ सब से हसीन राज हो |

परदा उठाओ अब,के बेसब्र दिल हुआ
या पलकों में सजता बस ख्वाब हो. |

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ल़हेरें

1.उठ उठ कर उँची  जाती है किनारों पर ल़हेरें
मानती है उनको किनारों से गहरा प्यार है 
लिपट कर वापस लौट जाती है चुपचाप सी 
जानती है सच्चाई,सागर उनका असली संसार है.  |

2.यूँही कभी मैं ख़याल कर जा
सोचती हूँ कोई ल़हेर बन पा
अथांग सागर में जीवन के उछलू
दूर से भी सबको नज़र  |

3.चंद्रमा सजीला
पौर्निमा की बहार
दरिया में हलचल
ल़हेरो की लगबग
सजी है आज
भरती की रात
होगी मिलन की बात
किनारो पर इंतज़ार था
प्यार के पूरे होंगे जज़्बात
कुछ पल की खुशियाँ
समेट लेंगी आचँल में
तनहाईयाँ बाटने
यादें ही काम आती है |

4.ल़हेरो को बेवजह क्यों बदनाम कर रखा है
के वो बेवक़्त तूफ़ानो का निमंत्रण लाती है
जब समंदर में राह से भटक जाए कश्ती
असीम ल़हेरें ही किनारों तक साथ देती है |

रुपहली किरनो से सजाया जो आसमान

रुपहली किरनो से सजाया जो आसमान
चाँद के बिन सितारे अधूरे  से लगते  है |

समंदर की गहराई में छुपाया जो खजाना
मोतियो  के बिन सीप अधूरे से लगते है |

इज़हार करने जाओ जो गमजमाना
आसुओ के बिन नयन अधूरे से लगते है |

महफ़िल में सजाओ जो गीतो का तराना
सुरताल  के बिन साज़ अधूरे से लगते है |

तुम हमे कितनी अज़ीज़ कैसे करे बयान
महक‘  के  बिन फूल अधूरे से लगते है |

कहते है लोग ये इश्क़

कहते है लोग ये इश्क़ top post

कहते है लोग,ये इश्क़ आग का दरिया होता है |
कैसे कहे,के इश्क़,किसिके दिल तक पहुँचने का ज़रिया होता है ||

कहते है लोग,ये इश्क़ एक आँधी लाती है |
हमे तो इश्क़ से,गिली मिट्टी की खुशबू,सौन्धि सौन्धि आती है ||

कहते है लोग,ये इश्क़ समंदर से भी गहरा होता है |
कैसे बताए,के इश्क़ में,हर पल एक नया सवेरा होता है ||

कहते है लोग,के इश्क़ में,कदम कदम पर संभालना होता है |
कैसे बताए,के इश्क़ में, दो दिलो को मिलकर,एक राह पर चलना होता है ||

कहते है लोग,के इश्क़ में,माँगनी होती एक मन्नत है |
कैसे समझाउ, के इश्क़ करना , हमारे लिए एक जन्नत है ||

कहते है लोग,ये इश्क़,किसी और की अमानत होती है |
कैसे कहे सबसे,ये इश्क़,खुदा की दी हुई एक नेमत होती है ||