हसरतो के कमल मेरे

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हसतो के कमल

आओ आओ सखियों आओ,कुछ राज़ बताना चाहूं मैं 
दिल की बगिया में अब के ,नये गुल खिलाना चाहूं मैं  |
 
नींद में जब सोई हुई थी,सपनो में खोई हुई थी 
कोई अजनबी दबे पाव आया,उलझी टो को सुलझाया 
उसके लबों की पंखुड़ियों को,हौले मुझ पर बरसया 
गुलाबी निशानियाँ रात की,सुबह गालों पर पा मैं  |
  
  आओ आओ सखियों आओ,कुछ राज़ बताना चाहूं मैं 
दिल की बगिया में अब के ,नये गुल खिलाना चाहूं मैं  |
  
  वही है जिसको खोज रही थी,जिसके लिए सोच रही थी 
कही दूर  था वो मुझ से,उसको अपने दिल में ही पाया 
हसतॉ के कमल पर मेरे,प्यार की दव बूंदे सजाया 
मोहोब्बत  के मंदिर में उसके,खुद को अर्पण कर  मैं  |
  
  आओ आओ सखियों आओ,कुछ राज़ बताना चाहूं मैं 
दिल की बगिया में अब के ,नये गुल खिलाना चाहूं मैं  |

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ख्वाब

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ख्वाब

अँखियों की  पलकों में समाए ये रहते
मन में छिपी बातों को हमसे ये कहते
कुछ स्याह कुछ इंद्रधनु से रंगीन ये ख्वाब |

नींद में कितने बन जाते ये अपने से
खुल जाए जो चक्षु  हो गये पराए वे
कुछ पाकर कुछ हाथों से ओझल ये ख्वाब |

ख्वाबों में जीना अक्सर ज़रूरी होता है
समझ कर उन्हे पाना मुश्किल होता है
दिखाते है अरमानो को मंज़िल ये ख्वाब |

ख्वाबो पर अपना हर पल निर्भर ना हो
अक्स छोड़ परछाई दिखाए वो दर्पण ना हो
कुछ खिलते कुछ खुद से बोझिल ये ख्वाब |