हाइकू – सवेरा

हाइकू – सवेरा

1. पंछीयो की किलबिल
    सूरज निकलते ही
    घरौंदा छोड़े

2. चाँद छुप गया
    चँदनी खो गयी
    अधूरे स्वप्न

3. दव की बूँदे
    फूल खिले है
    महेकती ताज़गी

4. घना सा कोहरा
   पत्तियों का जाल
   चमकी किरने

5. अरुण रथ दौड़ा
    एक नया दिन
    रौशन जहाँ

6. अख़बार के पन्ने
    चाय का प्याला
    तरोताज़ा दिन

7. प्रभु का नाम स्मरण
    शंख का नीनाद
    आशीर्वाद पाए

8. रंगो की चुनरी
    अंबर भी शरमाये
    भोर हुई

9. भीगे है गेसू
   गालो पे लट है
   मनमोहक अदा

10. काम पे जाना
    अपनो से दूर
     ज़िंदगी है

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उड़ जा पंछी भोर भई

अब तक तुम गहरी नींद सोए हुए हो
किन सच्चे झूठे सपनो में खोए हुए हो

वो कौनसी यादे है जो पीछा नही छोड़ती
वो कौनसी राहे है जो आगे नही बढ़ती

उन पुरानी यादों को तुम भुला दो
उन बेमानी बातों को तुम सुला दो

ख्वाबो और हवाओ में नही बनते महल
जिद्द पर तुम उतर आओ अगर
कीचड़ में भी खिल जाते है कवल

बस अपने धेय पर अटल रहना
दृढ़ निश्चय से जीवन लक्ष की और बढ़ना

जगाओ मन में आज,एक और नयी आशा
चूनलो अपने लिए,एक और नयी दिशा

कल की निशा के साथ,बीती बात गयी
उड़ जा रे पंछी , एक नयी भोर भई.