शब्दांचे आंगण

शब्दांचे आंगण किती निराळे 
शब्दांचे जग एकदम वेगळे 

शब्दांच्या घरात मी पण रहाते 
शब्दान मधूनच आपल्या भावना पहाते 

शब्द  कधी असतात जुई सारखे नज़ूक 
शब्द कधी असतात दगडा सारखे कठोर 

शब्ध कधी होतात ओसाड  रान
शब्द कधी हिरवे,कधी पिवळे  पा

शब्द कधी हळूवार वाहणारा झरा 
शब्द कधी टप टप पावसाच्या गारा 

शब्द सुरांचे,सगळ्यांना हवेसे 
शब्द बोचरे ,एकने पण नकोसे 

शब्दांचा सुशोभित बाण,जपुन वापरावा 
शब्दाने घायाळ कोणी,निर्माण करतो दुरावा 

शब्द आपले दुसर्यांच्या हृदयात फुलावे 
शब्ढ साखर दुधात मिसळून बोलावे. 

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shabdh

शब्दो का है निराला जहाँ
शब्दो का संसार बस्ता वहाँ
शब्दों के घर में,मे भी हूँ रहती
शब्दों के माध्यम से अपनी भावनाए कहती
शब्द कभी होते है फूलों से कोमल
शब्द कभी बन जाते,पत्थर से कठोर
शब्द कभी होते , जैसे शीतल सा झरना
शब्द कभी शोर,जैसे बारिश की बूँदो का गिरना
शब्द कभी आग और जलन बनकर आए
शब्द कभी लुभावनी हरीयाली बनकर छाए
शब्दो के मीठे सुर,सबको है प्यारे
शब्द जो दुख देते,हम करते उन्हे किनारे
शब्दों से सजाया तीर,संभलकर चलाना
शब्दों से हो घायल कोई,बन जाती दूरिया
शब्द हो ऐसे,जो हर दिल में खिल जाए
शब्द वहीं बोले, जो चीनी दूध सी मिठास लाए.