साथ में हम भी


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

1.जाम पर जाम छलकते रहे
आँखों में सपने पनपते रहे
मोहोब्बत-ए-महफ़िल सजी
रात भर शमा जलती रही
तेरा आना इंतज़ार बन गया
साथ में जले हम भी |

2.मध्यम सी चाँदनी बिखरी
चाँद आया,ये रात निखरी
आगोश में समा गयी चाँदनी
प्यार के अरमान हुए रौशन
तूने जो छू लिया हमे अब
साथ में बहके हम भी |
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शमा जलाकर हम बैठे है

हम सदा ही मुस्कुरा जाते है
आपके हर एक दीदार में |

मोहोब्बत के मोती पिरोए है
आपके हर लफ़्ज-ए- इज़हार में |

इश्क़   के   जाम  छलकते है
आपकी हर मीठि तकरार में |

सहर हमे तन्हा कर गयी है
आपके मिलन की खुमार में |

शमा जलाकर हम बैठे अब है
नयी शाम आने के इंतज़ार में |